दीपावली पर माता लक्ष्मी की आरती को लेकर कुछ ज्योतिषियों के दावों के बीच विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि यह आरती लक्ष्मी के स्वागत की प्रतीक है, न कि विदाई की। शंकराचार्य, प्राचीन लक्ष्मी मंदिर के महंत और ज्योतिषी विद्वानों के अनुसार, षोडशोपचार विधि के तहत लक्ष्मी की पूजा में आरती अनिवार्य है। लक्ष्मी पूजन के बाद आरती किए बिना पूजा को अधूरा माना जाता है।
आरती से होती है पूजा पूर्ण: विशेषज्ञों का मत
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि षोडशोपचार विधि में देवी की पूजा में आरती महत्वपूर्ण है। इस पूजा में 16 उपचार अर्पित किए जाते हैं, जिनमें आरती पूजा को संपूर्णता प्रदान करती है। ज्योतिषाचार्य डॉ. विनोद शास्त्री के अनुसार, आरती लक्ष्मी का घर में स्वागत करने के लिए होती है ताकि उनका आशीर्वाद हमेशा बना रहे।