केंद्रीय बजट 2026: कर व्यवस्था को सरल और करदाताओं के अनुकूल बनाने पर सरकार का जोर-CA उदेश घासोलिया
नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने कर व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और करदाताओं के अनुकूल बनाने के लिए कई अहम घोषणाएँ की हैं। बजट का प्रमुख उद्देश्य ईमानदार करदाताओं को राहत देना और कर विवादों में कमी लाना बताया गया है। सरकार ने इसे “ट्रस्ट आधारित टैक्स सिस्टम” की दिशा में एक ठोस कदम करार दिया है।
कर प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए असेसमेंट, री-असेसमेंट और अपील प्रक्रियाओं को डिजिटल, समयबद्ध और पारदर्शी बनाया गया है। इन सुधारों से करदाताओं और कर विभाग—दोनों के समय और संसाधनों की बचत होने की उम्मीद है। इसके साथ ही पेनल्टी और अभियोजन से जुड़े प्रावधानों को तर्कसंगत बनाकर अनावश्यक मुकदमेबाजी को कम करने का प्रयास किया गया है।
बजट में आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा में भी बदलाव किया गया है। नॉन-ऑडिट व्यवसाय या पेशे से जुड़े करदाताओं और नॉन-ऑडिट फर्मों के पार्टनरों के लिए ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है। हालांकि, ITR-1 और ITR-2 दाखिल करने वालों के लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई ही रहेगी।
संशोधित रिटर्न (Revised Return) दाखिल करने की अवधि को 9 महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दिया गया है, यानी अब 31 मार्च तक संशोधित रिटर्न दाखिल की जा सकेगी। हालांकि, 9 महीने के बाद रिटर्न दाखिल करने पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
एक अहम राहत के तौर पर अब घाटा (Loss) कम करने के लिए भी Updated Return दाखिल करने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा, री-असेसमेंट नोटिस जारी होने के बाद भी निर्धारित अतिरिक्त टैक्स के साथ Updated Return दाखिल की जा सकेगी, जिससे विवाद और मुकदमेबाजी में कमी आने की संभावना है।
बजट में मोटर एक्सीडेंट क्लेम पर मिलने वाले ब्याज को पूरी तरह कर-मुक्त कर दिया गया है और उस पर अब टीडीएस भी नहीं कटेगा, जिससे पीड़ितों को सीधी राहत मिलेगी।
कुल मिलाकर, बजट 2026 का कर ढांचा कर अनुपालन को आसान बनाने, विश्वास बढ़ाने और आर्थिक विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।