जिले में 9 दिन से 320 पटवारी अपनी 10 मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। सोमवार को जिले के 93 गिरदावर भी हड़ताल में शामिल हो गए। ऐसे में राजस्व कार्य पूरी तरह ठप है। पटवारी और गिरदावरों की ये चार माह में दूसरी हड़ताल है। पटवारियों ने सितंबर में इसी तरह कार्य बहिष्कार किया था। पटवारियों की ये मांगें 4 माह से लंबित हैं, लेकिन सरकार उन्हें पूरा नहीं कर रही है। पटवारियों को आश्वासन तो मिल रहा है, लेकिन समाधान नहीं हो रहा है। लिहाजा पटवारी बार-बार हड़ताल पर जा रहे हैं।
पटवारियों की हड़ताल के कारण आमजन और किसानों के काम अटक गए हैं। आम जनता और किसान 9 दिन से दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। जाति प्रमाण पत्रों के सत्यापन, भूमि विभाजन, रिकॉर्ड की नकल जारी होने से लेकर नामांतरण, दस्तावेजों का सत्यापन, प्रमाणीकरण, पटवारी रिपोर्ट के अभाव में सभी कार्य बाधित हैं। तहसीलों में सन्नाटा है। पटवारियों का कहना है कि जब तक सरकार लिखित समझौते को लागू नहीं करेगी, तब तक पटवारियों का आंदोलन जारी रहेगा।
पटवारी पद को तकनीकी पद घोषित कर ग्रेड-पे 3600 (एल-10) किया जाए। गिरदावरी एप में आवश्यक संशोधन करवाया जाए, ताकि गिरदावरी कार्य पटवारी द्वारा ही किया जाना संभव हो। बजट घोषणा 2023-24 के तहत 1035 नवीन पटवार मंडलों की घोषणा व स्वीकृति जारी की जाए। पटवारी, भू-अभिलेख निरीक्षक की डीपीसी कराई जाए। भू-अभिलेख निरीक्षक के 752 नवसृजित पदों को भरा जाए। पटवारियों को स्टोरेज का टेबलेट-लैपटॉप, प्रिंटर, इंटरनेट सुविधा उपलब्ध करवाई जाए। भू-अभिलेख निरीक्षक से नायब तहसीलदार में पदोन्नति कोटा बढ़ाया जाए। तहसीलदार पद पर मंत्रालयिक संवर्ग के कोटे का पुननिर्धारण किए जाने वाली पत्रावली का निस्तारण किया जाए। भू-प्रबंध आयुक्त द्वारा 2023 की स्थिति में नियम विरुद्ध जारी वरिष्ठता सूची को निरस्त किया जाए। हार्ड ड्यूटी एवं स्टेशनरी भत्तों में बढ़ोतरी की जाए।
जिले में 371 पंचायतें हैं। हर माह की पांच और 20 तारीख को ग्राम पंचायतों की मीटिंग होती है। इसमें विरासत समेत हक त्याग, उपहार लेख, वसीयत, दान लेख और समर्पण, न्यायालय आदेश नामांतरण का काम होता है। पंचायतों में हुई मीटिंग में इस बार नामांतरणों का काम अटक गया। जिले में सोमवार को हुई मीटिंग में एक हजार से ज्यादा नामांकन पेंडिंग रह गए। साथ ही किसान सम्मान निधि के आवेदन का काम नहीं हो पा रहा है। किसानों की केसीसी भी नहीं बन रही है।
रहननामा और रहन मुक्ति का रिकॉर्ड भी दर्ज नहीं हो रहा। जिलाध्यक्ष शीशराम चाहर ने बताया कि सरकार महज आश्वासन दे रही है। सितंबर में जल्द समाधान का आश्वासन मिला, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। इस वजह से मजबूरन हड़ताल करनी पड़ी। किसान और स्टूडेंट्स नामांतरण, दस्तावेजों की नकल, मूल निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र के लिए चक्कर लगा रहे हैं।