जीणमाता मंदिर अनिश्चितकाल के लिए बंद: पुजारियों से मारपीट के विरोध में बड़ा कदम…

गर्भगृह में पूजा जारी रहेगी, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए दर्शन पर रोक; पुजारी धरने पर बैठेंगे

सीकर जिले के प्रसिद्ध शक्तिपीठ जीणमाता मंदिर को 11 अप्रैल से अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है। मंदिर ट्रस्ट ने पुजारियों से हुई मारपीट की घटना के विरोध में यह निर्णय लिया है। ट्रस्ट की घोषणा के अनुसार मंदिर का गर्भगृह खुला रहेगा और वहां रोजाना की पूजा-अर्चना होती रहेगी, लेकिन श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति नहीं होगी। इस दौरान पुजारी मंदिर परिसर में धरना देंगे। ट्रस्ट ने मांग की है कि दोषियों की गिरफ्तारी जल्द हो, वरना यह आंदोलन जारी रहेगा।

मामला 3 अप्रैल को हुए वार्षिक लक्खी मेले के दौरान का है, जब जीणमाता मंदिर में बत्तीसी संघ के दर्शन के समय पुजारियों के साथ कथित रूप से मारपीट हुई। संघ और ट्रस्ट के बीच पहले से सहमति बनी थी कि दर्शन के वक्त केवल तीन पुजारी मौजूद रहेंगे, लेकिन उस समय निर्धारित संख्या से अधिक ट्रस्ट के सदस्य वहां मौजूद थे, जिससे विवाद हुआ और बात हाथापाई तक पहुंच गई। घटना के विरोध में सर्व समाज और संत समुदाय की बैठक के बाद मंदिर को बंद करने का निर्णय लिया गया। बत्तीसी संघ, जो 32 गांवों से मिलकर बना है, जीणमाता धाम में खास धार्मिक परंपराएं निभाता है और इसे मंदिर पर अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी का प्रतीक मानता है।