पूर्व राज्यसभा सांसद अश्क अली टांक का निधन, कांग्रेस ने एक समर्पित सिपाही को खोया
जयपुर, 5 अक्टूबर 2025
राजस्थान की राजनीति को आज एक अपूरणीय क्षति हुई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और राज्यसभा सांसद रहे अश्क अली टांक का रविवार को निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। सोमवार सुबह विद्याधर नगर स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।
अश्क अली टांक के निधन से प्रदेश कांग्रेस और पूरे राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर उनके साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा —
“अश्क अली के निधन का समाचार बहुत दुखद है। उन्होंने अपनी लम्बी राजनीतिक यात्रा में कई मुकाम हासिल किए। वे युवाओं के प्रिय नेता और संगठन के मजबूत स्तंभ थे। उनका जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है।”
🙏 कांग्रेस नेताओं ने जताया शोक
अश्क अली टांक को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, पीसीसी अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, विधायक रफीक खान, राजस्थान कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष एमडी चोपदार, फतेहपुर विधायक हाकम अली खां, सीकर विधायक राजेन्द्र पारीक, पूर्व केन्द्रीय मंत्री महादेव सिंह खण्डेला सहित तमाम नेताओं ने कहा कि कांग्रेस ने एक सत्यनिष्ठ, जमीनी और सक्रिय नेता को खो दिया है।
🏛️ राजनीतिक यात्रा और भूमिका
📌 प्रारंभिक जीवन
- जन्म: 7 जुलाई 1958, नूहड़ (हनुमानगढ़), राजस्थान
- माता: श्रीमती जोरा खातून
- पिता: श्री सादिक खां टांक
- शिक्षा: एम.ए. एवं ‘इंडियन थॉट’ में डिप्लोमा, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर
- व्यवसाय: सामाजिक-राजनीतिक सेवा, कृषि
📈 राजनीतिक करियर
- फतेहपुर से विधायक रहे
- 5 जुलाई 2010 – 4 जुलाई 2016 तक राज्यसभा सांसद के रूप में राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया
- NSUI और यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष रहे
- राजस्थान अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन भी रहे
- राजस्थान वक्फ बोर्ड में सक्रिय भूमिका निभाई
वे कांग्रेस के भीतर एक ईमानदार और सटीक आलोचक के रूप में भी पहचाने जाते थे। उन्होंने पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में एकजुटता और संवाद की आवश्यकता पर हमेशा जोर दिया।
🎤 विचारधारा और विशेषताएं
अश्क अली टांक का राजनीतिक जीवन जनसेवा, संगठनात्मक अनुशासन और विचारधारा पर आधारित रहा। वे अक्सर कांग्रेस पार्टी के आंतरिक निर्णयों में पारदर्शिता और संवाद की वकालत करते थे। उन्होंने यह भी कहा था कि—
“मंत्रिमंडल विस्तार और नियुक्तियाँ मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार हैं, लेकिन संवाद आवश्यक है।”
उनके कई बयान चर्चा में रहे, जिनमें उन्होंने बीजेपी को नाथूराम गोडसे का विचारधारात्मक उत्तराधिकारी और कांग्रेस को महात्मा गांधी की विरासत का वाहक बताया था।
🧾 संगठन में सक्रियता
स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद अश्क अली टांक हर छोटे-बड़े कांग्रेस कार्यक्रम में सक्रिय रूप से उपस्थित रहते थे। वे युवाओं के साथ निरंतर संवाद बनाए रखते थे और पार्टी को प्रदेश स्तर पर जमीनी मजबूती देने में जुटे रहते।
पूर्व सीएम गहलोत ने यह भी कहा:
“उन जैसे कार्यकर्ता बहुत कम होते हैं जो बीमारी के बावजूद संगठन के लिए पूरी ऊर्जा से जुटे रहते हैं।”
🕯️ श्रद्धांजलि और अंतिम यात्रा
अश्क अली टांक को सोमवार सुबह विद्याधर नगर के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। प्रदेश के कई बड़े नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और हजारों समर्थक उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचेंगे।
अश्क अली टांक का जीवन एक साधारण परिवार से उठकर राष्ट्रीय राजनीति के मंच तक पहुंचने की मिसाल है। उन्होंने पार्टी में अनेक दायित्व निभाए, और हर भूमिका में अपनी ईमानदारी, निष्ठा और साहस का परिचय दिया। उनका जाना राजस्थान ही नहीं, कांग्रेस पार्टी के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है।
अल्लाह उन्हें जन्नत में आला मुकाम अता फरमाए। आमीन।