मसोटिया गांव की मिर्ची बनी किसानों की किस्मत का सितारा…

बांसवाड़ा जिले के मसोटिया गांव की मिर्ची की बढ़ती डिमांड और किसानों की समृद्धि

बांसवाड़ा जिले का मसोटिया गांव अपनी तीखी मिर्ची के लिए देशभर में जाना जाता है। यहां की मिर्ची का स्वाद और तीखापन खास है, जो इसे अन्य मिर्चों से अलग बनाता है। मसोटिया की मिर्ची का यह खास गुण फाइव स्टार होटलों और रेस्टोरेंट्स तक पहुंच चुका है। मसोटिया गांव, जो बांसवाड़ा शहर से 18 किलोमीटर दूर स्थित है, 80 साल से मिर्ची की खेती के लिए प्रसिद्ध है। यहां की उपजाऊ मिट्टी और अनुकूल जलवायु मिर्ची के उत्पादन के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।

मसोटिया गांव के किसानों के लिए मिर्ची की खेती अब एक परंपरा बन चुकी है। यहां लगभग 180 परिवारों का मुख्य व्यवसाय मिर्ची की खेती है। एक बीघा मिर्ची से किसान हर साल 15 से 20 क्विंटल उत्पादन प्राप्त करते हैं, जिससे उन्हें अच्छे लाभ की प्राप्ति होती है। मिर्ची के उत्पादन के साथ-साथ यह गांव कृषि के क्षेत्र में भी एक मिसाल बन गया है, और अब अन्य आसपास के गांवों के किसान भी मिर्ची की खेती को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

मिर्ची की खेती का वैज्ञानिक तरीका और उत्पादन

मसोटिया गांव में मिर्ची की खेती के लिए विशेष प्रकार के बीज जैसे सुजंटा, अवतार, कलर्स और तेजस का उपयोग किया जाता है। इन बीजों से उगाई गई मिर्च तीखी और स्वाद में अलग होती है। मिर्ची की खेती में महिला किसानों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि तुड़ाई का काम काफी मेहनत का होता है। खेतों में मिर्ची के पौधे लगाने के बाद, 7 से 8 महीने तक यह लगातार उत्पादन देती है, और किसानों को हर सीजन में अच्छा लाभ होता है।

मसोटिया के किसान प्रति बीघा लगभग 40 हजार रुपये की लागत से मिर्ची की खेती करते हैं, जिसमें बीज, खाद, सिंचाई और तुड़ाई की लागत शामिल है। हालांकि, उत्पादन बढ़ने के साथ किसान प्रति बीघा 1 से 2 लाख रुपये तक मुनाफा कमाते हैं। यह मिर्च न केवल स्थानीय बाजारों में, बल्कि अन्य राज्यों में भी भेजी जाती है और आचार बनाने के लिए भी उपयोग की जाती है।

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