मानवता की मिसाल: समाजसेवी भंवरलाल जांगिड़ ने हर की पौड़ी पर किया अनाथों की अस्थियों का विसर्जन

मानवता की मिसाल: समाजसेवी भंवरलाल जांगिड़ ने हर की पौड़ी पर किया अनाथों की अस्थियों का विसर्जन

मानवता की मिसाल: समाजसेवी भंवरलाल जांगिड़ ने हर की पौड़ी पर किया अनाथों की अस्थियों का विसर्जन

हरिद्वार/सीकर।
जहाँ रिश्ते-नाते साथ छोड़ देते हैं, वहाँ इंसानियत का धर्म निभाने के लिए समाजसेवी भंवरलाल जांगिड़ आगे आते हैं। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर जांगिड़ ने 27 वर्षों से निभाई जा रही अपनी सेवा परंपरा को जारी रखते हुए हरिद्वार स्थित पवित्र गंगा तट हर की पौड़ी पर अनाथ और लावारिस मृतकों की अस्थियों का विधि-विधान से विसर्जन किया।

चार मासूमों और माँ को दिलाया ‘मोक्ष’

हाल ही में एक रेजीडेंसी में चार मासूम बच्चों और उनकी माँ द्वारा आत्महत्या की हृदयविदारक घटना ने समाज को झकझोर कर रख दिया था। इस दर्दनाक घटना के बाद जब कोई परिजन अस्थियां लेने नहीं पहुँचा, तब भंवरलाल जांगिड़ ने स्वयं अपने खर्चे और निजी वाहन से अस्थियों को हरिद्वार पहुँचाया।

आज प्रातःकाल हर की पौड़ी पर पंडित तुषार शर्मा (देवम) के मंत्रोच्चारण के साथ सभी आत्माओं की शांति के लिए श्रद्धापूर्वक अस्थि विसर्जन किया गया।

27 वर्षों से निस्वार्थ सेवा का संकल्प

भंवरलाल जांगिड़ पिछले 27 वर्षों से लावारिस और असहाय मृतकों के अंतिम संस्कार का दायित्व निभा रहे हैं।

  • अपनों की बेरुखी में सहारा: प्रेम प्रसंग या पारिवारिक विवादों के कारण आत्महत्या करने वाले कई युवक-युवतियों के शव जब परिजन लेने से इंकार कर देते हैं, तब जांगिड़ आगे आकर अंतिम संस्कार करवाते हैं।

  • गरीबों के मसीहा: आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवारों के लिए वे संबल बनते हैं और क्रियाकर्म का पूरा खर्च वहन करते हैं।

  • सेवा ही साधना: अस्थि विसर्जन के पश्चात उन्होंने गौ माता को हरा चारा खिलाया तथा पंडितों को दान-दक्षिणा देकर भोजन करवाया।

समाज के लिए संदेश

जांगिड़ ने मृतका ‘किरण’ का उदाहरण देते हुए युवाओं और समाज की बेटियों को संदेश दिया कि अपनों को छोड़कर मोह-माया और भ्रमित सपनों के पीछे भागने का अंत अक्सर दुखद होता है। उन्होंने कहा कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में संवाद और सहारा ढूँढना आवश्यक है।

काफी इंतजार के बाद जब किरण की अस्थियां लेने कोई परिजन नहीं आया, तो जांगिड़ ने स्वयं पिता का धर्म निभाते हुए उसे सम्मानजनक विदाई दी।

“मानवता किसी जाति या पहचान की मोहताज नहीं है। अंतिम सफर में लावारिस का सहारा बनना ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है।”
— भंवरलाल जांगिड़

भंवरलाल जांगिड़ की यह पहल न केवल मानवता की मिसाल है, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश भी है कि अंतिम समय में भी किसी को अकेला न छोड़ा जाए।

abtakhindi khabarhindi newsrajasthanshekhawati newsSikarsikar hindi newssikar khabarSIKAR NEWS