राजस्थान सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ की योजना के तहत 6,857 ग्राम पंचायत चुनावों को टालने पर विचार कर रही है, इसके लिए प्रशासनिक व्यवस्था की तैयारी भी की जा रही है। इससे पहले, सरकार ने 49 स्थानीय निकायों में प्रशासक नियुक्त किए थे। इस कदम को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस और कानूनी विशेषज्ञों ने सरकार पर संविधान का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने कहा कि चुनाव टालना संविधान के खिलाफ है और वे इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।
कानूनी जानकारों का कहना है कि 73वें और 74वें संविधान संशोधन के तहत पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव 5 साल के भीतर अनिवार्य रूप से कराए जाने चाहिए। सिर्फ आपात स्थितियों में ही चुनाव टाले जा सकते हैं। इसके अलावा, सरकार को पंचायती राज संस्थाओं को भंग कर प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार है, लेकिन यह प्रक्रिया लंबी और जटिल है। इसके लिए पहले नोटिस जारी करना और जवाब सुनना जरूरी है। इस बीच, अगर किसी संस्था के दो तिहाई सदस्य इस्तीफा दे देते हैं या बर्खास्त होते हैं, तो भी प्रशासक नियुक्त किया जा सकता है।