लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से लिवर की दुर्लभ गांठ (हाइडैटिड सिस्ट) का सफल इलाज

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से लिवर की दुर्लभ गांठ (हाइडैटिड सिस्ट) का सफल इलाज

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से लिवर की दुर्लभ गांठ (हाइडैटिड सिस्ट) का सफल इलाज

सीकर।
वरिष्ठ गैस्ट्रोसर्जन डॉ. विक्रम सिंह सोढ़ा द्वारा लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से लिवर की एक दुर्लभ और जटिल बीमारी हाइडैटिड सिस्ट का सफलतापूर्वक इलाज किया गया। 35 वर्षीय महिला मरीज पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में लगातार दर्द की शिकायत के साथ परामर्श के लिए आई थीं।

जांच के दौरान पेट के सीटी स्कैन में यह सामने आया कि मरीज के लिवर के दाहिने लोब में 12 x 15 सेमी आकार की हाइडैटिड सिस्ट मौजूद है, जो एक दुर्लभ पैरासाइटिक बीमारी है। इसके बाद डॉ. विक्रम सिंह सोढ़ा एवं उनकी विशेषज्ञ टीम ने सीकर में ही अत्याधुनिक लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कर गांठ को सुरक्षित रूप से निकाल दिया।

इस जटिल सर्जरी में गैस्ट्रोसर्जरी टीम में डॉ. विक्रम सिंह सोढ़ा, डॉ. पवन टंडन, डॉ. पवन नागल सहित सहयोगी स्टाफ प्रदीप, सचिन, दिनेश, हेमंत और सुरेंद्र शामिल रहे। सर्जरी पूरी तरह सफल रही और मरीज को ऑपरेशन के तीसरे दिन ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

डॉ. सोढ़ा ने बताया कि हाइडैटिड सिस्ट एक पैरासाइटिक रोग है, जो Echinococcus granulosus नामक टेपवर्म से होता है और यह आमतौर पर कुत्तों व भेड़ों के संपर्क से फैलता है। इसके 70 से 80 प्रतिशत मामलों में लिवर प्रभावित होता है। बीमारी की पहचान सीटी स्कैन और सीरोलॉजी टेस्ट से की जाती है। इलाज में सर्जरी को गोल्ड स्टैंडर्ड माना जाता है, साथ ही ऑपरेशन से पहले और बाद में अल्बेंडाजोल दवा 1 से 3 माह तक दी जाती है।

उन्होंने बताया कि लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के कारण मरीज को कम दर्द, कम रक्तस्राव और तेज रिकवरी का लाभ मिलता है। यह सीकर जैसे शहर में जटिल गैस्ट्रो, लिवर एवं अग्नाशय सर्जरी की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है।

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