शेखावाटी साहित्य संगम का हुआ भव्य आग़ाज़ 

शेखावाटी साहित्य संगम का हुआ भव्य आग़ाज़ 

शेखावाटी साहित्य संगम का हुआ भव्य आग़ाज़

सीकर।

हर वर्ष की भाँति शेखावाटी साहित्य संगम का आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय के मुख्य प्रांगण में शुभारंभ हुआ था जिसकी अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफ़ेसर अनिल कुमार राय ने की एवं मुख्य वक्ता अखिल भारतीय साहित्य परिषद के सह संगठन मंत्री मनोज कुमार रहे सीकर में हर वर्ष जैन भवन में आयोजित होने वाले शेखावाटी साहित्य संगम का स्वरूप इस वर्ष संपूर्ण शेखावाटी में जा रहे इस भाव को लेकर के शेखावाटी साहित्य संगम की टीम ने अपने साथ में अखिल भारतीय साहित्य परिषद को भी जोड़ा है एवं शेखावाटी के सीकर नवलगढ़ पिलानी चूरू सरदारशहर लक्ष्मणगढ़ आदि अनेक कस्बों में अलग अलग पुस्तकों पर परिचर्चा एवं चिंतन रखकर अलग अलग विषय विशेषज्ञों द्वारा चर्चाएँ रखने का प्रयास किया गया है जो 24 सितम्बर 2 अक्टूबर तक चलेगा । पहला सत्र में पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा रचित पुस्तक जगद्गुरु शंकराचार्य पर परिचर्चा का रहा है जिसमें माँ सरस्वती एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया गया उसके बाद निर्मल आर्य डॉक्टर कमलेश शर्मा व बजरंग लाल पवन शर्मा चन्द्र प्रकाश आदि वक्ताओं ने इस पुस्तक पर अपने अपने विचार रखे उसके बाद मुख्य वक्ता मनोज कुमार ने कहा कि इस पुस्तक का ये बत्तीसवाँ संस्करण है और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की दृष्टि एकात्म वाद की थी लेखक ने इस पुस्तक में पाठक चाहता है उसके अनुसार उपन्यास लिखा जब ये संन्यासी बने लेकिन जवाब था कि मैं कभी अलगाववादी नहीं बनूंगा पंडित दीनदयाल उपाध्याय में संवेदनशीलता  भरी हुई थी अक्सर देखने में आता है कि लेखक बहुत लंबे समय में पुस्तक लिखते हैं लेकिन यह पुस्तक भोत कम समय में पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा लिखी गई उनका सूक्ष्म दृष्टिकोण जीवन को वास्तविकता एवं मौलिकता के साथ जीती थी यह पुस्तक 111 पेज और अट्ठारह अध्याय में बनी इस परिचर्चा में यह बात निकलकर आयी कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक बहुत उच्च कोटि के साहित्यकार भी रहे हैं जिन्होंने बहुत अच्छे ग्रन्थ लिखे हैं जो समाज के समक्ष आना बहुत ज़रूरी है है अंत में कुलगुरु प्रोफ़ेसर अनिल राय ने आभार प्रकट किया और कहा कि अखिल भारतीय साहित्य परिषद और शेखावाटी साहित्य संगम ने विश्वविद्यालय पर बहुत बड़ा उपकार किया है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती के पावन दिन पर उनकी लिखी गई पुस्तक जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य पर परिचर्चा महाविद्यालय परिसर में रखी गई है विश्वविद्यालय का ये प्रयास रहेगा कि पंडित दीनदयाल जी का जो रूप निखर के आया है कि वो साहित्यकार भी थे इस विषय पर यहाँ शोध का भी कोई प्रयास किया जाएगा इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर गण शोधार्थी एवं साहित्य में रुचि रखने वाले  जन उपस्थित रहे हों।

दूसरा सत्र 4 बजे से राजकीय कन्या महाविद्यालय सीकर में सम्पन्न हुआ उसमें भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा रचित उस तक चंद्रगुप्त पर परिचर्चा हुई और मुख्य वक्ता मनोज कुमार उपस्थित रहे कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य अरविंद कुमार महला ने की इस अवसर पर भी महाविद्यालय के समस्त प्रवक्ता गढ़ रहे हैं एवं पुस्तक चंद्रगुप्त के ऊपर विस्तार से मनोज कुमार ने प्रकाश डाला और उपस्थित महाविद्यालय आचार्यों ने भी अपना संघ का समाधान किया और इस बात की आवश्यकता जतायी कि समाज के अंदर शेखावाटी साहित्य संगम के माध्यम से ऐसे आयोजनों को किया जाना बहुत ही सराहनीय कार्य है आज के दौर में किसी पुस्तक पर परिचर्चा होना अपने आप में गंभीर विषय हैं महाविद्यालय प्राचार्य अरविन्द महिला ने कहा कि आज हमारा सौभाग्य है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जहाँ पढ़े लिखे उसी स्थान पर उनकी जन्म जयंती पर उनके द्वारा लिखी गई पुस्तक चंद्रगुप्त पर परिचर्चा हुई मैं शेखावाटी साहित्य संगम की पूरी टीम और अखिल भारतीय साहित्य परिषद की टीम को शुभकामनाएं बधाई और धन्यवाद देना चाहता हूँ

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