श्री झल्डा वाले बालाजी धाम, कंवरपुरा रोड नाथावतपूरा में चल रहे तृतीय वार्षिक महोत्सव के दौरान आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का समापन हुआ। अंतिम दिन सुदामा चरित्र के प्रसंग पर प्रवचन हुए, जिसमें पं. कुलदीप शर्मा शास्त्री ने व्यास पीठ से कथा का वाचन किया और भागवत कथा का गूढ़ अर्थ श्रद्धालुओं को समझाया।
महाराज ने कहा कि भागवत विराट है और इसका समापन नहीं हो सकता, सिर्फ विश्राम दिया जाता है। कथा के दौरान श्री कृष्ण-रुक्मिणी और सुदामा की जीवंत झांकी सजाई गई। महाआरती के बाद भागवत कथा का विश्राम हुआ और श्रद्धालुओं ने व्यास पीठ की परिक्रमा की। महाप्रसादी का आयोजन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद प्राप्त किया।
शाम को भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें अतिथि कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं। इसके पूर्व, बालाजी मंदिर के महंत रमाशंकर दाधीच के सानिध्य में पूर्णाहुति यज्ञ किया गया। कथा के समापन पर यजमान और सहयोगी कार्यकर्ताओं का सम्मान किया गया। इस अवसर पर मुकेश खडोलिया सहित अन्य लोग भी मौजूद थे।
इससे पहले, पालवास स्थित करणी माता मंदिर के चंद्रमादास महाराज ने भी भागवत कथा के दौरान प्रवचन दिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से संस्कारों को न छोड़ने की अपील की और कहा कि आजकल परिवारों में संस्कारों का अभाव दिखाई दे रहा है, जो चिंताजनक है। महाराज ने भागवत कथा के महत्व को बताते हुए सभी से गोसेवा की अपील की।