संयुक्त परिवार की परंपरा धीरे-धीरे कम होती जा रही है, लेकिन इसके कई फायदे हैं, जो मानसिक और भावनात्मक मजबूती प्रदान करते हैं। शोध बताते हैं कि परिवार के साथ समय बिताने से तनाव कम होता है, आर्थिक सहयोग मिलता है, और बच्चों को संस्कारों व परवरिश का बेहतर माहौल मिलता है।
राजस्थान के धोद गांव के चेताराम ढाका (85) का 61 सदस्यों वाला परिवार इस परंपरा का जीवंत उदाहरण है। चेताराम का मानना है कि त्याग, संयम, और सहयोग ही परिवार की नींव है। खेती-बाड़ी और विभिन्न व्यवसायों से जुड़े इस परिवार ने जिम्मेदारियों का बंटवारा कर संतुलित जीवनशैली अपनाई है। रोजाना 40 किलो दूध और 5 किलो सब्जी की जरूरत पूरी करने के लिए परिवार सामूहिक रूप से कार्य करता है। चेताराम का परिवार न केवल एकता का संदेश देता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि कठिन समय में साथ रहना हर समस्या का हल हो सकता है।