सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भारी कमी के कारण शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। सफाई कर्मियों की कमी के चलते कई स्कूलों में शिक्षकों को खुद झाड़ू लगानी पड़ रही है और टॉयलेट की सफाई भी करनी पड़ रही है। स्कूलों के ताले खोलने, बंद करने और घंटी बजाने जैसे काम भी शिक्षकों को करने पड़ रहे हैं।
सीकर जिले में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 1050 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 819 पद खाली पड़े हैं। 25 वर्षों से इनकी भर्ती नहीं हुई, जबकि नए स्कूल लगातार खोले गए हैं। शिक्षकों की भी भारी कमी बनी हुई है, जिससे पढ़ाई का स्तर गिर रहा है।
सरकारी स्कूलों में नामांकन भी लगातार घट रहा है। सीकर जिले में एक साल में 23,615 छात्रों की कमी दर्ज की गई है। प्रदेशभर में भी पिछले तीन वर्षों में नामांकन 98 लाख से घटकर 72 लाख रह गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि प्रवेश के लिए उम्र सीमा बढ़ाने का भी असर पड़ा है।
शिक्षकों की इस कमी को दूर करने के लिए ई-पाठशाला, डिजिटल स्टूडियो और मोबाइल एप जैसी योजनाएं शुरू की गईं, लेकिन वे नामांकन बढ़ाने में कारगर साबित नहीं हो पाई हैं। प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के 3.71 लाख स्वीकृत पदों में से 1.16 लाख पद खाली पड़े हैं, जिससे सरकारी शिक्षा प्रणाली गंभीर संकट का सामना कर रही है।