साहित्य पत्रकारिता की परछाई:- गजेन्द्र कविया स्नेह मिलन समारोह में काव्य पाठ से उठाये ज्वलन्त मुद्दे
पत्रकार समिति दांतारामगढ़ के तत्वावधान में हुआ आयोजन
जीणमाता।
साहित्य के बिना समाज संवेदनहीन व चेतनाहीन हो जाता हैं। साहित्य के सृजन के लिए इतिहास का अध्ययन व मानवीय चेतना का स्तर प्रखर होना आवश्यक है साथ ही साहित्य पत्रकारिता की ही परछाई होती है। यह बात दुरदर्शन व आकाशवाणी के लोकप्रिय उद्घोषक व कवि गजेन्द्र सिंह कविया ने रविवार को निमेड़ा के श्री सिद्धनाथ आश्रम के पास पाराशर पंचवटी में आयोजित पत्रकार साहित्यकार स्नेह मिलन समारोह में मुख्य वक्ता के रुप में कही। कविया ने अपनी एक से बढ़कर कविताओं से वर्तमान राजनीति व आधुनिक परिवेश पर शाब्दिक कटाक्ष किया वही अपनी हास्य रचनाओं से उपस्थित पत्रकारों व साहित्यकारों को हास्यरस से भाव भिवोर कर दिया। समारोह की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यकार जगन्नाथ प्रसाद मर्मी ने पत्रकारों से मानवीय मूल्यों व सामाजिक चेतना से जुड़ी खबरों पर भी ध्यान देने का आग्रह किया वहीं आपसी मेलजोल व समन्वय बनाये रखने की नसीहत दी। पत्रकार समिति दांतारामगढ़ के तत्वावधान में नव वर्ष के उपलक्ष में आयोजित इस समारोह में समिति अध्यक्ष प्रमोद शर्मा ने सभी उपस्थित बुद्धिजिवियों से रचनात्मक सहयोग व स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से आने वाली समस्याओं का सामना करने की अपील की। विशिष्ट अतिथि प्रदीप निराणियां ने कहा कि हर समय समाज की सेवा में जुटे रहने वाले पत्रकारों व साहित्यकारों को समय-समय पर ऐसे आयोजन करके आत्म अवलोकन भी करना चाहिए। मेजबान दीपक पराशर ने सभी आगंतुकों को दुपट्टा ओढ़ाकर व प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मान किया। बालिका गर्विता और मानस्वी ने सभी अतिथियों का तिलकार्चन कर स्वागत किया। इस दौरान विशिष्ट अतिथि सुरेंद्र मिश्रा, विनोद भारती, राकेश मिश्रा, ओम शर्मा, रणजीत सिंह शेखावत,प्रदीप सैनी आदि ने समारोह को संबोधित किया। समारोह में आनंद सिंह,मनीष शर्मा,सीताराम मर्मी, पवन शर्मा, सुरेश नेमीवाल, अर्जुन राम मुंडोतिया, नरेश कुमावत,विद्याधर शर्मा, राजेश धायल, राजेश्वर भाट, विष्णु तिवारी, विजेंद्र सिंह दायमा, सुनील यादव, कुंदन खाचरियावास, रमेश प्रजापत, हनुमान प्रसाद जाट,राकेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में पत्रकार-साहित्यकार मौजूद रहे। अंत में सभी ने सामूहिक भोजकर एक इसे एक यादगार आयोजन बताया।