किरडोली (सीकर) का लाल, फौजी जाबिर खान- देश की शान,सेना का गर्व।।
चीफ ऑफ आर्मी के साथ 14 जनवरी को लंच और 15 जनवरी जयपुर परेड में मुख्य अतिथि-किरडोली का फौजी बना इतिहास।।
शौर्य की अमर गाथा: जाबिर खान फौजी – किरड़ोली का गौरव
सीकर
जब देश की सीमाओं पर खून की होली खेली जाती है, तब कुछ जांबाज़ सिपाही ऐसे होते हैं जो मौत को भी ठेंगा दिखाकर दुश्मन को धूल चटाते हैं। ऐसे ही एक अनमोल रत्न हैं जाबिर खान फौजी साहब किरड़ोली, जिनकी देशभक्ति हर धड़कन में कूट-कूट कर झलकती है।
2007 में बारामूला, जम्मू-कश्मीर की उस खूंखार मुठभेड़ में, जब आतंकवादियों ने मौत का तांडव मचाया, तब राष्ट्रीय राइफल बटालियन ओर उस बटालियन के जांबाज सिपाही जाबिर खान किरडोली ने उनकी कमर तोड़ दी। तीन गोलियां जाबिर खान के सीने में उतर आईं – एक गोली आज भी उनके सीने में मौजूद है, जैसे कोई जीता-जागता निशान जो चीख-चीख कर कहता है – “मैंने देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया!” फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। सीने में गोलियां लिए, खून से लथपथ शरीर के साथ उन्होंने अंत तक लड़ाई जारी रखी – यही है असली देशभक्ति का असली रंग, यही है भारतीय सैनिक की वो अनमोल विरासत!
आज पूरे सीकर जिले से एकमात्र जवान के रूप में 14 जनवरी को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के साथ लंच पर बुलाए जाना और 15 जनवरी को जयपुर की ऐतिहासिक परेड में मुख्य अतिथियों के मंच पर विराजमान होना – यह महज कोई सम्मान नहीं, बल्कि किरड़ोली और पूरे राजस्थान की शान है। यह वह पल है जब पूरा देश देखता है कि कैसे एक सच्चा सपूत, गोली खाकर भी अडिग खड़ा रहा, और आज उसी बहादुरी का फल स्वरूप सेना का सर्वोच्च नेतृत्व उसे गले लगा रहा है। जाबिर खान फौजी , आपका यह बलिदान और देशप्रेम हर भारतीय के सीने में एक नई आग जला रहा है – जय हिंद! जय भारत!