कांग्रेस सरकार ने चुनावी साल में जिले में आनफानन में 100 से अधिक महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल शुरू किए थे, लेकिन अब भजनलाल सरकार इन स्कूलों को बंद करने की तैयारी में है। सरकार ने मंत्रिमंडल स्तरीय समीक्षा समिति का गठन कर कम नामांकन वाले स्कूलों को बंद या मर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जनवरी में जिले के 18 स्कूलों को बंद किया जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस सिलसिले को आगे भी जारी रखते हुए कई और स्कूल बंद करने की योजना बना रही है। यदि नामांकन के आधार पर इन स्कूलों की समीक्षा की जाती है, तो जिले के करीब 123 स्कूल बंद किए जा सकते हैं। सीकर जिले में वर्तमान में 201 महात्मा गांधी स्कूल संचालित हो रहे हैं।
भास्कर द्वारा शिक्षा विभाग के आंकड़ों की पड़ताल की गई, तो यह सामने आया कि करीब 123 स्कूलों में नामांकन 100 से कम है। इनमें सबसे ज्यादा 23 स्कूल खंडेला ब्लॉक के हैं। वहीं, लक्ष्मणगढ़ ब्लॉक के 21, दांतारामगढ़ ब्लॉक के 18, पिपराली ब्लॉक के 16, नीमकाथाना ब्लॉक के 15, धोद ब्लॉक के 14 और अतीजगढ़ ब्लॉक के 13 स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों में 72 स्कूलों में नामांकन 50 से भी कम है। जिला शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, जिले के 14 स्कूलों में नामांकन 20 से भी कम है। इनमें फतेहपुर के डूंगराना जोहड़ा महात्मा गांधी स्कूल में सिर्फ 12 और ढांढ़ण के महात्मा गांधी स्कूल में 13 छात्र हैं। वहीं, खंडेला और धोद के तीन स्कूलों में कोई विद्यार्थी नहीं है।
खंडेला के निमेड़ा में नामांकन 0 है, जबकि जयरामपुरा में महज 17 छात्र हैं। नेछवा के घिरणियां बड़ा व रुल्याणी माली में 9-9 छात्रों का नामांकन है। वहीं, घरोंदा व मीरण में नामांकन 0 है। धोद के बगड़ियां की ढाणी में 7 और दूगोली में 15 छात्र नामांकित हैं। लक्ष्मणगढ़ के राजास में 4 और बासनी में 3 छात्रों का नामांकन है। अजीतगढ़ के धाबावाली में महज 6 विद्यार्थी हैं।
पाटन ब्लॉक के सभी आठ स्कूलों में नामांकन 100 से ज्यादा है। वहीं, जिले में इंग्लिश मीडियम स्कूलों में छात्राओं का रुझान अधिक है। 201 महात्मा गांधी स्कूलों में कुल 24,290 विद्यार्थी हैं, जिनमें से 13,195 छात्राएं और 10,895 छात्र हैं। नर्सरी कक्षाओं में 2,649 का नामांकन है, जिसमें 1,373 छात्राएं हैं।
शिक्षा विभाग की गाइडलाइंस के अनुसार, एक से पांचवीं कक्षा तक न्यूनतम नामांकन 60 होना चाहिए। लेकिन 50% से अधिक कक्षाओं में 10 से कम छात्रों का नामांकन है, जबकि 30% कक्षाओं में नामांकन 0 है। इस स्थिति के मद्देनजर दो बार प्रवेश की अंतिम तिथि बढ़ाने के बावजूद महात्मा गांधी स्कूलों में नामांकन का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका।
राज्य सरकार ने इस मुद्दे की समीक्षा के आदेश दिए हैं और संचालन का अंतिम निर्णय भी सरकार ही लेगी।