सीकर शिखर पर : गोपालन का राष्ट्रीय पुरस्कार हर्षित को
गोपालन के क्षेत्र में देश के सर्वाच्च राष्ट्रीय गोपाल रत्न अवार्ड 2025 प्राप्त कर हर्षित झूरिया ने राजस्थान का नाम देशभर में रोशन किया है। 26 नवम्बर 2025 को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस पर नई दिल्ली में सुषमा स्वराज भवन में आयोजित राष्ट्रीय दुग्ध दिवस समारोह में पुरस्कार वितरण का आयोजन किया गया। जिसमें बेस्ट डेयरी फार्मर केटेगरी में हर्षित झूरिया को राष्ट्रीय गोपाल रत्न आवर्ड से नवाजा गया। झूरिया को पुरस्कार स्वरूप भारत सरकार द्वारा 2 लाख रूपये, मेरिट सर्टिफिकेट एवं प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया।
केन्द्रीय पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री प्रोफेसर एस.पी.एस. भघेल और जार्ज कुरियन द्वारा इन पुरस्कारों को प्रदान किया गया। डेयरी क्षेत्र में नवाचार, गुणवत्ता एवं तकनीकी उत्कृष्ठता का समावेश कर देशी गौ-वंश संवर्धन का अनुकरणीय मॉडल पेश कर हर्षित ने शेखावाटी एवं राजस्थान का देशभर में नाम ऊँचा किया है। देशी गौवंश की पौराणिक स्थानीय नस्ल थारपारकर एवं साहीवाल की श्रेष्ट गायों एवं नंदियों का चयन कर Selective Breeding अपना कर शुद्ध नस्ल की गायें तैयार करना इनकी प्राथमिकता है।
A-2 बीटा केसिन प्रोटीन का दुग्ध उत्पादन करने वाली इन गायों के दूध, घी एवं अन्य उत्पादों की राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों में भारी मांग है।
प्राकृतिक दृष्टि से समृद्ध अरावली पर्वत श्रृंखला की तलहटी में लोहार्गल एवं चिराना कस्बे के बीच अवस्थित गौ-फार्म में 350 गायें निवास कर रही हैं।
हर्षित ऑर्गेनिक खेती एवं पेस्टीसाईड व एन्टीबायोटिक रहित शुद्ध दुध का उत्पादन करते हैं। हर्षित का मानना है कि गायों को खुला रखना, बछडियों को अपनी माँ के साथ अधिक समय व्यतीत करवाना एवं तनावमुक्त आवास व शुद्ध पानी की उपलब्धता से गायों के व्यवहार में न्यूनतम आक्रामकता एवं अधिक उत्पादकता मिलती है। इनके फार्म पर तैयार बछड़ियों के व्यवहार में शालीनता एवं दुग्ध उत्पादकता में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। गायों के व्यवहार में इस तरह के परिवर्तन पर MDI गुड़गाँव के प्रोफेसर्स का हावर्ड विश्वविद्यालय के शोध -पत्र में प्रकाशन हेतु एक शोध भी चल रहा है।
हर्षित ने इन दोनो दुर्लभ नस्लों पर संवर्धन कार्य करते हुए देशी गायां की पहचान विशिष्ट व्यक्तियों तक बनाई एवं घोड़ो की तरह गायों के पालन को भी शानोशौकत वाला बना दिया, जिससे एक -एक गाय की कीमत दस लाख तक पहुंचा दी। भविष्य में इससे सामान्य पशुपालकों को भी शुद्ध देशी गायों का प्रीमियम मूल्य मिलने लगेगा। हर्षित का लक्ष्य है कि जिस प्रकार इनके फार्म से निकला शुद्ध A-2 दूध बेहतर दरों पर बाजार में बिकता है उसी प्रकार हरेक किसान को उसकी देशी गायों के दूध उत्पादन का उचित मूल्य मिलें।
बचपन से मेधावी विद्यार्थी रहे हर्षित ने स्कूली शिक्षा में अव्वल स्थान प्राप्त करते हुए अपने स्वयं के प्रयासों से बिना कोचिंग संस्थानों में दाखिला लिये घर पर तैयारी करते हुए अमेरिका की प्रतिष्ठित वर्जिनिया टेक. विश्वविद्यालय से बी.टेक. के लिए प्रवेश लिया एवं डिग्री के उपरान्त नौंकरी करने के बजाय गायों पर शोध आधारित एक स्टार्टअप चालू किया।
जिसने पाँच वर्षो में ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी श्रेष्ठता साबित कर दी। हर्षित ने इस उपलब्धि के लिए परिवारजनों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि अमेरिकी परिजनों की तरह ही मेरे माता- पिता ने मुझे काम करने की स्वतंत्रता दी एवं मेरे विजन को समझते हुए भरपूर सहयोग दिया।
हर्षित के पिता भगवान सिंह भारतीय जीवन बीमा निगम में विकास अधिकारी एवं माता सुमन राजकीय कंला महाविद्यालय सीकर में प्रोफेसर है एवं छोटा भाई भव्य अमेरिका में वर्जीनिया टेक. विश्वविद्यालय से कम्प्यूटर सांईस में मास्टर्स डिग्री कर रहा है। हर्षित की धर्मपत्नी डॉ. निफीया सिंह ने हाल ही में आई.आई.टी. रूड़की से भौतिक शास्त्र विषय में क्वान्टम कम्प्यूटिंग पर पी.एच.डी.की है।