हुज़ूर नसीरे मिल्लत ने किया हज़रत पीर ग़ुलामे नजम साहब को अपना जानशीन (उत्तराधिकारी) मुन्तख़ब
सीकर/फतेहपुर
हुज़ूर शहंशाहे विलायत नजमुल औलिया ख़्वाजा हाजी मुहम्मद नजमुद्दीन सुलैमानी चिश्ती अल्फ़ारूक़ी रहमतुल्लाह के 160 वें उर्स मुबारक के मौके पर हुज़ूर नसीरे मिल्लत ने दरगाह शरीफ़ के ज़ाबते 1932 के ऐन मुताबिक बजरिये बैत, ख़िलाफ़त व वसीयत के, अपने शहज़ादा और मुरीदे रासिखुल यक़ीन हज़रत पीर ग़ुलामे नजम साहब नजमी सुलैमानी चिश्ती अल्फ़ारूक़ी को इजाज़ते सिलसिला ए आलिया नजमिया सुलैमानिया चिश्तिया कादरिया सुहारवर्दिया नक़्शबंदिया अता फरमा कर अपना जानशीन (उत्तराधिकारी) और अपने बाद ख़ानक़ाहे आलिया नजमिया सुलैमानिया फ़ख़रिया निज़ामिया चिश्तिया बहिशतिया फ़तेहपुर का सज्जादानशीन व मुतवल्ली मुन्तख़ब व मुक़र्रर फ़रमाया। इस तक़रीबे सईद में बतौर मेहमाने ख़ुसूसी हज़रत पीर सय्यद मेहबुबुल आरफ़ीन साहिब निज़ामी सज्जादानशीन दरगाह हज़रत ख़्वाजा निज़ामुद्दीन औरंगाबादी रहमतुल्लाह अलैह औरंगाबाद से तशरीफ़ लाए। उनके साथ दरगाह हज़रत मौलाना ज़ियाउद्दीन साहिब चिश्ती जयपुर के सज्जादानशीन हज़रत पीर सय्यद ज़ियाउद्दीन साहिब ज़ियाई भी तशरीफ़ लाए। हुज़ूर नसीरे मिल्लत ने शहज़ादा ए हुज़ूर नसीरे मिल्लत को ख़िलाफ़त नामा अता कर दस्तारबंदी फ़रमाई उसके बाद मेहमान सज्जादगान ने भी आप की दस्तारबंदी की और तमाम मुरीदीन व हाज़िरीन ने भी शहज़ादा ए हुज़ूर नसीरे मिल्लत की गुलपोशी कर मुबारक बाद पेश की।