राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय का शासन सचिव (वित्त) से वित्तीय मांगों को लेकर प्रतिनिधिमंडल से संवाद…
छठे और सातवें वेतनमान सहित कई मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा
राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय प्रदेश सभा अध्यक्ष संपत सिंह ने बताया कि संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा के नेतृत्व में शासन सचिव (वित्त) खुशहाल यादव से विभिन्न वित्तीय मांगों को लेकर वार्ता की। इस दौरान प्रदेश संगठन मंत्री घनश्याम, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवि कुमार आचार्य सहित अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने बताया कि लंबे समय से विभिन्न केडरों के शिक्षकों की कई वित्तीय मांगें लंबित थीं, जिनके निस्तारण के लिए शासन सचिव से चर्चा की गई। प्रमुख मांगों में छठे और सातवें वेतनमान की विसंगतियों को दूर करना, खेमराज कमेटी और सावंत कमेटी की रिपोर्टों को सार्वजनिक करना, सातवें वेतनमान के तहत पे-मैट्रिक और लेवल निर्धारण करने, 01 जनवरी 2016 से नगद परिलाभ देने की मांग शामिल है।
इसके अलावा, राजस्थान कांट्रेक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट रूल 2022 के तहत संविदा शिक्षकों के पदों को नियमित करने और 23000 पदों के लिए वित्तीय स्वीकृति जारी करने की भी मांग की गई। साथ ही, नव क्रमोन्नत विद्यालयों में शिक्षा निदेशालय के अनुसार पद सृजन कर वित्तीय स्वीकृति देने की मांग की गई। प्रदेश अध्यक्ष पुष्करणा ने शिक्षकों को उनकी पहली नियुक्ति तिथि से ए.सी.पी. का लाभ देने, पी.डी. मद के तहत वेतन बजट हेतु एकमुश्त बजट आंवटित करने और वेतन भुगतान कोष कार्यालय से करने की व्यवस्था शीघ्र लागू करने की बात की। इसके अतिरिक्त, तृतीय श्रेणी शिक्षक/प्रबोधक की वेतन विसंगति को दूर करने की भी मांग की गई।
प्रदेश संगठन मंत्री घनश्याम ने विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के लिए नियमित बजट जारी करने, मुख्यमंत्री जनसहभागिता योजना के तहत लंबित प्रस्तावों का शीघ्र निस्तारण करने और प्रदेश में उच्च माध्यमिक स्कूलों में शैक्षिक पदों का आवंटन करने की मांग रखी। उन्होंने टेबलेट/लेपटॉप वितरण के लिए राज्य अंशदान की बकाया स्वीकृति जारी करने का भी अनुरोध किया, ताकि विद्यार्थी योजना का लाभ समय पर प्राप्त कर सकें। जिला मंत्री कल्याण सिंह ने बताया कि वार्ता के बाद मीडिया से बातचीत में प्रदेश अध्यक्ष पुष्करणा ने स्पष्ट किया कि शासन सचिव के साथ संगठन की वार्ता सकारात्मक रही है, और उम्मीद है कि राज्य के लाखों शिक्षकों को शीघ्र उचित परिणाम मिलेंगे।
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