हरि नाम संकीर्तन में झूमे हजारों श्रद्धालु, भक्ति में सराबोर हुआ कथा पांडाल

इन्द्रेश जी महाराज ने सुनाए कपिल, ध्रुव, जड़ भरत और अजामिल चरित्र के भावपूर्ण प्रसंग

हरि नाम संकीर्तन में झूमे हजारों श्रद्धालु, भक्ति में सराबोर हुआ कथा पांडाल

इन्द्रेश जी महाराज ने सुनाए कपिल, ध्रुव, जड़ भरत और अजामिल चरित्र के भावपूर्ण प्रसंग

सीकर।

श्री गोविंदम गार्डन में स्व. महेश जी सिंधी की पावन स्मृति में आयोजित महेशम श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पूज्य इन्द्रेश जी महाराज ने कपिल चरित्र, ध्रुव चरित्र, जड़ भरत कथा एवं अजामिल चरित्र के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, संकल्प और हरिनाम की महिमा का संदेश दिया। कथा के दौरान हुए हरि नाम संकीर्तन में हजारों श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे और पूरा पांडाल भगवान के जयकारों से गूंज उठा।

इन्द्रेश जी महाराज ने कहा कि भगवान की भक्ति और हरि नाम का स्मरण मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाने का सरल मार्ग है। ध्रुव चरित्र के माध्यम से उन्होंने दृढ़ संकल्प और अटूट भक्ति की शक्ति बताई, वहीं अजामिल चरित्र के माध्यम से भगवान के नाम की महिमा का वर्णन किया। कपिल एवं जड़ भरत के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को वैराग्य, आत्मज्ञान और सद्मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

बचपन से डालें भक्ति के संस्कार

महाराज ने कहा कि बच्चों में बचपन से ही भक्ति और अच्छे संस्कार डालना जरूरी है। कथा सुनना, भजन करना और भगवान का स्मरण करना बुढ़ापे का काम नहीं है। बचपन से जिस कार्य का अभ्यास किया जाता है, वही संस्कार जीवनभर साथ रहते हैं। उन्होंने कहा कि 55 वर्ष की उम्र में भक्ति शुरू करने की सोचेंगे तो उसे सहज रूप से अपनाना कठिन होगा।

उन्होंने कहा कि सत्य से बड़ा कोई धर्म नहीं है और सत्य स्वयं श्रीकृष्ण का स्वरूप है। कथा के दौरान मोबाइल के बढ़ते उपयोग पर भी उन्होंने चिंता जताते हुए श्रद्धालुओं से कथा श्रवण के समय मोबाइल से दूरी बनाए रखने का आह्वान किया।

राजस्थान की भक्ति परंपरा का किया उल्लेख

इन्द्रेश जी महाराज ने राजस्थान की भक्ति परंपरा का उल्लेख करते हुए अजब कुमारी और श्रीनाथजी के अनन्य प्रेम का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि राजस्थान की धरती भक्ति और भाव से ओतप्रोत रही है तथा सीकर और शेखावाटी क्षेत्र में भी धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं की समृद्ध विरासत है।

ये रहे मौजूद

मीडिया प्रभारी संजय मोर ने बताया कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व कैबिनेट मंत्री राजस्थान सरकार डॉ. बी.डी. कल्ला, स्थानीय विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र पारिक, निवर्तमान सभापति जीवन खां, पूर्व विधायक राजकुमारी शर्मा, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष पवन मोदी, रामेश्वर रणवा, जितेन्द्र कारंगा, सीए सुनील मोर, किशन सिंह एवं परमेश्वर शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

कथा के आयोजक नरेश सिंधी ने सपत्नीक व्यास पीठ पर पहुंचकर कथावाचक इन्द्रेश जी महाराज का स्वागत एवं अभिनंदन किया। मंच संचालन विष्णु पारीक ने किया।

इस अवसर पर दिनेश बियानी, सत्य सोमानी, मनीष काबरा, सुशील मटोलिया, विक्रम सिंह वाहिदपुरा,
राहुल तिवाड़ी, कपिल मांगनानी, नरपतसिंह, मुकेश भाटीवाड़ा, गौरव सोमानी, मुरारी बियानी, पवन सोडाणी, संजय शर्मा, सुभाष शर्मा, विजय झाझूका, पायल नारवानी, स्वाति बियानी, सुरुचि सोमानी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता एवं हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे। कथा स्थल पर दिनभर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

 

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