कूदन के यशराज सिंह ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जीते तीन स्वर्ण पदक, अब एशियन गेम्स में भारत का करेंगे प्रतिनिधित्व…

कूदन गांव के बेटे ने राष्ट्रीय स्तर पर लहराया परचम, अब नेपाल और दुबई में दिखाएंगे दम

सीकर जिले के कूदन गांव के युवा एथलीट यशराज सिंह ने 28 से 31 जनवरी 2025 तक जयपुर में आयोजित 11वीं संयुक्त भारतीय खेल फाउंडेशन की राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में 10KM, 5KM और 3KM दौड़ों में तीन स्वर्ण पदक जीतकर न केवल अपने गांव बल्कि पूरे जिले और राज्य का नाम रोशन किया है। यशराज की इस शानदार उपलब्धि पर जयपुर के एस एम एस स्टेडियम में उनका भव्य स्वागत किया गया, जहां हजारों लोग उनकी जीत का जश्न मनाने के लिए जुटे थे।

SBKF (संयुक्त भारतीय खेल फाउंडेशन) की डायरेक्टर शिवा तिवाड़ी ने यशराज की सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा, “यशराज ने अपनी कड़ी मेहनत और संघर्ष से साबित किया कि कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती, जब तक कि दिल में जुनून हो। तीन स्वर्ण पदक जीतने के बाद, अब वे अप्रैल 2025 में नेपाल और दुबई में होने वाले एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।”

यशराज की सफलता की कहानी एक प्रेरणा है। वह एक साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं और अभी कक्षा 9 के छात्र हैं। उन्होंने आठ साल की उम्र से दौड़ने की ट्रेनिंग शुरू की थी और अब तक कई मैराथन, अल्ट्रा मैराथन और क्रॉस कंट्री प्रतियोगिताओं में भी सफलता प्राप्त की है। उनका सपना है कि वे भविष्य में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाएं और समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाएं।

यशराज की माता वसु कंवर एक गृहिणी हैं और उनके पिता प्रहलाद सिंह एक सरकारी शिक्षक हैं, जिन्होंने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया। यशराज अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता की प्रेरणा और अपने कोच जितेन्द्र शर्मा के मार्गदर्शन को देते हैं। कोच जितेन्द्र शर्मा के साथ मिलकर यशराज ने कठिन ट्रेनिंग की और उनकी बताई गई एक्सरसाइज और डाइट प्लान का पूरी तरह पालन किया।

यशराज की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से कूदन गांव में खुशी का माहौल है और यह साबित करता है कि अगर किसी में मेहनत और लक्ष्य की भावना हो, तो वह किसी भी ऊंचाई तक पहुंच सकता है। यशराज अब एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार हैं, और उनकी यह यात्रा उन्हें और भी ऊंचाइयों तक पहुंचाने की उम्मीद करती है।

यशराज सिंह की सफलता से यह भी संदेश मिलता है कि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों से भी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने देश का नाम रोशन कर सकते हैं, बशर्ते उन्हें सही मार्गदर्शन और समर्थन मिले।

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