बालिका आदर्श विद्या मंदिर में मातृ सम्मेलन सम्पन्न…
संस्कार व नैतिकता पर चर्चा, शिशु शिक्षा पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति की प्रमुख बातें
शहर के बालिका आदर्श विद्या मंदिर में मातृ सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां शारदा के समक्ष दीप जलाकर की गई। प्रधानाचार्य राकेश कुमार पारीक ने कहा कि बालक के जीवन में मां का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। राधाकिशन चोबदार ने इस पर जोर दिया कि समाज के युवाओं में मोबाइल की लत बढ़ रही है, जबकि पहले दादा-दादी और नाना-नानी की कहानियां नैतिक शिक्षा प्रदान करती थीं। डॉ. दीपिका शर्मा ने बताया कि मां बालक की प्रथम गुरु होती है, जो संस्कारों का निर्माण करती है। प्रांत अधिकारी गोपाल पारीक ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार शिशु शिक्षा बाल केन्द्रित और क्रिया-आधारित होनी चाहिए।
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