जयपुर
तुलसी मानस संस्थान, जयपुर के तत्वावधान में तुलसीदास जयंती महोत्सव के अवसर पर तुलसी-साहित्य परिचर्चा का आयोजन हुआ जिसमें सनातन संस्कृति-दर्शन-धर्म-अध्यात्म व साहित्य के परिपेक्ष्य में तुलसी-साहित्य पर मंथन हुआ। साथ ही, काव्य सिद्धांतों के संदर्भ में भी विवेचना की गई। परिचर्चा में प्रो. सन्तु अर्थशास्त्री ने विशय-प्रवर्तन किया और चर्चा में साहित्यकार राधेश्याम भारतीय, लेखक प्रताप सिंह, डॉ. अक्षांश भारद्वाज, राजस्थान लेखिका संघ की सदस्य माधवी मुखर्जी ने भाग लिया। परिचर्चा की अध्यक्षता डॉ. कल्याण प्रसाद वर्मा ने की। कार्यक्रम का संचालन संस्थान की सचिव श्रीमती उमा कुमावत और अतिथियों का शाल अर्पण और बाद में आभार ज्ञापन किया। परिचर्चा में यह तथ्य उभर कर आया की तूलसी साहित्य का ध्येय मनोरंजन नहीं लोकरंजन है। इसका विषय लोक मंगलकारी और सर्वसमनवयकारी है। कार्यक्रम का समापन श्री प्रेमचंद शर्मा के गाए तुलसी भजन के साथ हुआ। उल्लेखनीय है कि सीकर जिले के ग्राम रोई के मूल निवासी प्रो.सन्तु अर्थशास्त्री आकाशवाणी केंद्र जयपुर से प्रसारित ” ढ़ाणी की वाणी” कार्यक्रम के लेखक और ” अमृतकलश” काव्य कार्यक्रम के प्रमुख कवि के रूप में जनमानस पर अपनी अमिट छाप छोड़ चुके हैं।हाल ही के वर्षों में आपके दो काव्य संग्रह ‘ अमृत कलश'(2023)और ‘ वन्दे सनातनम् ‘(2026) बहुचर्चित रहे हैं। तुलसी साहित्य के अध्ययन – अनुशीलन में आपकी रुचि बाल्यकाल से रही है। वर्तमान में आप ‘ तुलसी मानस संस्थान ‘ के उपाध्यक्ष के रूप में तुलसी साहित्य के प्रचार-प्रसार में संलग्न हैं।