*विकसित भारत @ 2047 के लिए धारणक्षम कृषि पर राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ, ओम बिरला बोले— “मजबूत किसान ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला”
दिल्ली
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ए.बी.आर.एस.एम.) एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आई.सी.ए.आर.) के संयुक्त तत्वावधान में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सहयोग से “विकसित भारत @ 2047 के लिए धारणक्षम कृषि : परंपरा, प्रौद्योगिकी एवं मूर्त परिणाम” विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ शनिवार को राष्ट्रीय कृषि विज्ञान भवन, नई दिल्ली में हुआ।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संपत सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने उद्बोधन में कहा कि “किसान जितना मजबूत होगा, देश आर्थिक और सामाजिक रूप से उतना ही मजबूत होगा।” उन्होंने परंपरागत कृषि ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वित उपयोग पर बल देते हुए कहा कि कम लागत, अधिक उत्पादन और टिकाऊ कृषि व्यवस्था ही विकसित भारत के संकल्प को साकार करने का आधार बनेगी। उन्होंने वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों की सहभागिता को राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक बताया।
सम्मेलन की अध्यक्षता ए.बी.आर.एस.एम. के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. नारायणलाल गुप्ता ने की। उद्घाटन सत्र में आई.सी.ए.आर. के एडीजी डॉ. आर.के. सिंह, संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, राष्ट्रीय महामंत्री प्रो. गीता भट्ट, प्रो. गुरदेव चंद, गुंथा लक्ष्मण, महेंद्र कुमार तथा डॉ. आलोक सिंह सहित अनेक शिक्षाविद्, कृषि वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
सम्मेलन में देशभर के कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, वैज्ञानिकों, शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं ने कृषि नवाचार, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग तथा किसानों की आय वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन का उद्देश्य विकसित भारत @ 2047 के लिए धारणक्षम, समावेशी एवं नवाचार आधारित कृषि मॉडल तैयार करना है।