गणतंत्र दिवस परेड 2025: राजस्थान की झांकी की अनोखी झलक…

‘सोणो राजस्थान’ थीम पर तैयार हो रही झांकी में विरासत और विकास की प्रदर्शनी

26 जनवरी 2025 को दिल्ली में होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में राजस्थान की झांकी विशेष आकर्षण का केन्द्र होगी। इस बार झांकी को ‘सोणो राजस्थान’ की थीम पर तैयार किया जा रहा है, जिसमें राज्य की समृद्ध विरासत और हालिया विकास की झलक दिखाई जाएगी। झांकी में तीज माता की सवारी, शेखावाटी की हवेलियां, झरोखे और राजस्थान की चित्रकारी को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा, इसे तकनीकी दृष्टि से भी आधुनिक बनाया जाएगा, जिसमें राज्य के विकास को डिजिटल माध्यमों के जरिए प्रदर्शित किया जाएगा।

राजस्थान सरकार के आर्ट एंड कल्चर डिपार्टमेंट ने ललित कला अकादमी को इस झांकी का निर्माण कार्य सौंपा है। झांकी का मॉडल और डिजाइन जयपुर के वरिष्ठ चित्रकार हरशिव शर्मा द्वारा तैयार किया जा रहा है। राजस्थान ललित कला अकादमी के सचिव डॉ. रजनीश हर्ष ने बताया कि इस बार झांकी में राजस्थान की विविधता को बारीकी से पेश किया जाएगा, जिसमें तीज माता की सवारी से लेकर शेखावाटी की हवेलियों तक का दृश्य शामिल होगा।

तीज माता की सवारी से शेखावाटी की हवेलियों तक
राजस्थान की झांकी में सबसे प्रमुख आकर्षण तीज माता की सवारी होगी, जो जयपुर से जुड़ी एक अहम परंपरा है। यह सवारी त्रिपोलिया गेट से होकर निकलती है और इसे देखने के लिए पर्यटक दूर-दूर से जयपुर आते हैं। इसके बाद झांकी में शेखावाटी की हवेलियां और झरोखे प्रदर्शित किए जाएंगे, जो राजस्थान की समृद्ध कला, संस्कृति और विरासत को दर्शाएंगे। हवेलियों पर की गई चित्रकारी और स्थापत्य कला भी इस झांकी में विशेष आकर्षण रहेगी।

टेक्नोलॉजी से जुड़ा राजस्थान का विकास
इस बार झांकी में टेक्नोलॉजी का भी समावेश किया जाएगा। इसमें एक बड़ी साइज की एलईडी स्क्रीन पर राजस्थान के विकास को दिखाया जाएगा। खासतौर पर, जैसलमेर और बाड़मेर जैसे थार क्षेत्र में बढ़ती हरियाली और अनार जैसी फसलों की खेती के बदलाव को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा, राजस्थान के सबसे बड़े सोलर पार्कों और उनकी देशभर में बिजली आपूर्ति को भी झांकी में दिखाया जाएगा।

रक्षा मंत्रालय से चल रही मीटिंग्स में इस झांकी के विभिन्न पहलुओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है, और इसके निर्माण कार्य की निगरानी की जा रही है। इस झांकी के माध्यम से राजस्थान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ राज्य सरकार की योजनाओं और विकास को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

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