टोंक के समरावता गांव में 13 नवंबर की रात: पुलिस और ग्रामीणों के बीच संघर्ष के बाद की घटनाएँ…

कर्फ्यू जैसी स्थिति: पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल, आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति

13 नवंबर की रात टोंक जिले के देवली-उनियारा क्षेत्र स्थित समरावता गांव में एक घमासान मच गया। आरोप है कि पुलिस ने निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा और उनके समर्थकों को गिरफ्तार करने के लिए गांव में अराजकता फैलाने का काम किया। गांववासियों के अनुसार, पुलिस ने न केवल घरों में घुसकर महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के साथ मारपीट की, बल्कि गाड़ियों में तोड़फोड़ कर उन्हें आग के हवाले भी कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और फायरिंग भी की, जिससे गांव में दहशत का माहौल बना।

हालांकि, टोंक एसपी विकास सांगवान ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि पुलिस का उद्देश्य किसी को मारने या गाड़ियां जलाने का नहीं था। एसपी ने दावा किया कि पुलिस की गाड़ियों पर ही हमला हुआ और पत्थरबाजी की घटना पुलिस पर हुई थी। उन्होंने यह भी बताया कि इस दौरान नरेश मीणा पुलिस की हिरासत से भाग गए थे और इलाके में बाहरी लोग भी मौजूद थे।

ग्राउंड रिपोर्ट: वीडियो और गवाहियों से खुलते हैं नए पहलू

भास्कर की टीम ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर घटनाओं के तथ्यों की जांच की, और कुछ वीडियो फुटेज सामने आए, जो पुलिस की कार्रवाइयों के बारे में नई जानकारी दे रहे थे।

  • पुलिसकर्मी द्वारा पत्थर फेंकने का वीडियो: एक सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि एक पुलिसकर्मी एक पत्थर उठाकर पास के घर की ओर फेंकता है। इस घटना को ग्रामीणों ने देखा और इसे पुलिस की उत्पीड़न की कार्रवाई के तौर पर पेश किया।
  • फायरिंग और आंसू गैस के गोले: एक और वीडियो में पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले छोड़े जाने और फायरिंग की घटनाएं रिकॉर्ड हुईं। इसमें दिख रहा है कि एक तीन मंजिला मकान के पास पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े।
  • 12 महीने के बच्चे का घायल होना: एक ग्रामीण महिला ने बताया कि आंसू गैस का गोला उनके 12 महीने के बेटे के पैर पर गिरा, जिससे बच्चे का पैर जल गया।
  • बड़ी संख्या में लोग जुटे थे: तीसरे वीडियो में कुछ लड़के हाथों में लाठियां लेकर एक दूसरे को घेरते हुए और पत्थर फेंकते दिखे।

नरेश मीणा की गिरफ्तारी और संदिग्ध गतिविधियाँ

इन घटनाओं के दौरान नरेश मीणा और उनके समर्थक मंच से काफी आक्रोशित थे, और गांव में हलचल मच गई। हालांकि, इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं हो पाई है।

समरावता गांव में 13 नवंबर को हुई घटनाओं ने दोनों पक्षों के बीच गंभीर आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति उत्पन्न कर दी है। पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि पुलिस ने इसे अपने बचाव में नकारा है।

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