वरिष्ठ कवि प्रो. संतु अर्थशास्त्री कृत काव्य संग्रह वन्दे सनातमम् का विमोचन
काव्य संग्रह पठनीय होने के साथ संग्रहणीय हैः डॉ. व्यास
वरिष्ठ कवि प्रो. संतु अर्थशास्त्री कृत काव्य संग्रह वन्दे सनातमम् का विमोचन
काव्य संग्रह पठनीय होने के साथ संग्रहणीय हैः डॉ. व्यास
समारोह का आकर्षण रहा प्रो. संतु अर्थशास्त्री का काव्यपाठ
सीकर।
सुसज्जित मंच। दुधिया रोशनी। और गरिमामय व सादगी के माहौल में वरिष्ठ कवि प्रो. संतु अर्थशास्त्री की गीतों की बेहतरीन प्रस्तुति। तालियों की गडगडाहट। ओर मंत्रमुग्ध व भाव-विभोर होते श्रोतागण। कुछ ऐसा ही नजारा रहा शनिवार को राजधानी जयपुर के सांगानेर एयरपोर्ट स्थित एस.एस.जैन महिला शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेज में आयोजित वरिष्ठ कवि प्रो. संतु अर्थशास्त्री की कृति काव्य संग्रह वन्दे सनातनम् के विमोचन व परिचर्चा समारोह का। वरिष्ठ कवि प्रो. संतु अर्थशास्त्री ने काव्य संग्रह के गीतों की प्रस्तुति देकर समारोह में मौजूद श्रोताओं को न केवल मंत्रमुग्ध व भाव-विभोर कर दिया अपितु माहौल में ताजगी भरते हुए खासी तालिया भी बटोरी। प्रो. संतु अर्थशास्त्री ने कमलासना मां, एक आधुनिक भारतीय मध्यवर्गीय नारी, मां-बाप, हे नर्मदेश्वर, विदुरनीति, चातक, गीता संदेश और वंदे सनातनम् जैसे गीतों की बेहतरीन प्रस्तुति दी ओर माहौल को खुशनुमा बना दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ णमोकार मंत्र, मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रजवल्लन, राष्टगीत एवं राष्टगान के समेवत स्वरों से हुआ। अतिथियों को माला, साफा पहना, शॉल ओढाकर व श्रीफल देकर स्वागत व अभिनंदन किया गया। काव्य संग्रह वन्दे सनातनम् के विमोचन के बाद समारोह के अतिथियों को एडवोकेट जेपी. शर्मा ने काव्य संग्रह वन्दे सनातनम् की प्रति भेंट की।
काव्य संग्रह पर परिचर्चाः वरिष्ठ कवि प्रो. संतु अर्थशास्त्री कृत काव्य संग्रह वन्दे सनातनम् के विमोचन पर हुई परिचर्चा में समारोह के मुख्य अतिथि देश के जाने माने साहित्य एवं कला समीक्षक डॉ. राजेश कुमार व्यास ने परिभेष्ठि, सृष्टि, समष्टि और व्यष्टि खंडो की प्रतिनिधि कविताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह काव्य संग्रह पठनीय होने के साथ ही संग्रहणीय है। समारोह के मुख्य वक्ता डॉ. इंदुशेखर ने सनातन धर्म, संस्कृति दर्शन की विस्तृत व्याख्या कर कहा कि सनातन के प्रति कवि का भक्तिभाव इतना प्रगाढ है कि वह प्राकृतिक सौंद्रर्य से लेकर जीवन के छोटे क्रियाकलापों तक में सनातन तत्व का दर्शन कर लेता है। वरिष्ठ कवि गोविन्द भारद्वाज ने कहा कि वंदे सनातनम् के गीतों में सनातन कभी धर्म, कभी संस्कृति, कभी मूल्य तो कभी रीति-नीति बनकर हमारे समक्ष प्रस्तुत होता है। काव्य संग्रह पर लेखिका डॉ. रजनी भारद्वाज ने कहा कि इस कृति में परमेष्ठिी से व्यष्ठि तक का सफर पाठक को परलौकिक से लौकिक जगत में विचरण करा जाता है। ओर सनातन जीवन मूल्यों के प्रति निष्ठा भाव से भर जाता है। सभापति डॉ. लक्ष्मीनारायण सिंह चैहान चातक ने अध्यक्षीय उद्बोधन दिया। सांगोनर बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव एडवोकेट जयप्रकाश शर्मा ने आगंतुकों का आभार जताया। राष्टगीत के सामुहिक गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम का संचालन कॉलेज की हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजना शर्मा ने किया। एस.एस.जैन सुबोध महिला शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेज के हिन्दी विभाग व तुलसी मानस संस्थान जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में हुए काव्य संग्रह का विमोचन व परिचर्चा का आयोजन हुआ। कॉलेज की प्राचार्य प्रो. डॉ. यदु शर्मा ने मंचस्थ अतिथियों का हरित पादप अर्पण से अभिनंदन व समारोह में मौजूद साहित्यकारों, कवियों, गीतकारों का शब्द सुमन से स्वागत किया। इस मौके पर एडवोकेट विजयलक्ष्मी शर्मा ने महिला अतिथियों का पुष्प गुच्छ देकर अभिनंदन किया। कार्यक्रम में साहित्यकार, कवि, लेखक, समीक्षक, प्रोफेसर के अलावा एडवोकेट हरिशंकर शर्मा, डॉ. शारदा शर्मा, एडवोकेट दिनेश शर्मा, एडवोकेट शुभांगी शर्मा, कुमकुम शर्मा, कामाक्षी शर्मा, भुवन शर्मा, हेमंत शर्मा सहित कॉलेज के लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के समापन के बाद सहभोज भी हुआ।
सनातन सौरभी की उपाधि से नवाजाः तुलसी मानस संस्थान, जयपुर की ओर से समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किए जाने पर डिग्गी के पं. राधेश्याम शर्मा, सीकर के थोई से गो भक्त जीवनराम शर्मा, फागी से पं प्रेम कुमार शर्मा व सांगानेर से पं. सुदेश शर्मा को सनातन सौरभ की उपाधि के सम्मान से नवाजा गया।
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