शेखावाटी विवि में पंडित दीनदयाल उपाध्याय अवतरण दिवस पर विभिन्न आयोजन

पंडित उपाध्यायजी की आर्थिक लोकतंत्र की अवधारणा, आज भी प्रासंगिक : यूडीएच मंत्री खर्रा

शेखावाटी विवि में पंडित दीनदयाल उपाध्याय अवतरण दिवस पर विभिन्न आयोजन
पंडित उपाध्यायजी की आर्थिक लोकतंत्र की अवधारणा, आज भी प्रासंगिक : यूडीएच मंत्री खर्रा

आर्थिक लोकतंत्र की अवधारणा पर विचार संगोष्ठी और दीपोत्सव में जलाए 15000 दीपक

सीकर 25​ सितम्बर।

 

पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर में गुरुवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय अवतरण दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। दिनभर चली गतिविधियों में राष्ट्रीय विचार संगोष्ठी, पुस्तक परिचर्चा, रंगोली, संभाषण, निबंध लेखन प्रतियोगिताएं और भव्य दीपोत्सव प्रमुख आकर्षण रहे।

शेखावाटी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ)अनिल कुमार राय ने बताया कि ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय की आर्थिक लोकतंत्र की अवधारणा’ विषय पर राष्ट्रीय विचार संगोष्ठी हुई। मुख्य अतिथि शहरी विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि उपाध्याय जी का आर्थिक लोकतंत्र अंत्योदय पर आधारित है, जो आत्मनिर्भर भारत के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि पंडित जी समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुविधाएं पहुंचाने के पक्षधर थे।
विशिष्ट अतिथि राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि अब शेखावाटी विवि का स्वरूप एकदम बदल गया है, यहां विकास और विद्या​र्थियों की चहलपहल नजर आने लगी है। इसका श्रेय कुलगुरु प्रो. अनिल कुमार राय को जाता है।
तिवाड़ी ने कहा कि एकात्म मानववाद को आर्थिक लोकतंत्र से जोड़ते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने पर बल दिया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के 109वें अवतरण दिवस पर सभी को शुभकामनाएं देते हुए पंडित दीनदयाल जी का दूसरा महत्वपूर्ण विचार ‘अंत्योदय’ है
मुख्य वक्ता, जेएनवीयू के पूर्व कुलपति प्रो. लोकेश कुमार शेखावत ने आर्थिक लोकतंत्र को सामाजिक न्याय का आधार बताते हुए इसकी समकालीन उपयोगिता पर प्रकाश डाला। आज के समय में भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार उतने ही प्रासंगिक हैं।
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, जयपुर प्रांत के अध्यक्ष राजीव सक्सेना ने आर्थिक लोकतंत्र को डिजिटल अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता से जोड़कर समझाया। संगोष्ठी की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. अनिल कुमार राय ने की, जिन्होंने उपाध्याय जी के विचारों को वर्तमान चुनौतियों का समाधान बताया। कुलगुरु प्रो. राय ने कहा कि दीपोत्सव उपाध्याय जी के अंत्योदय, समग्र विकास और भारतीय संस्कृति के संवर्धन की भावना का प्रतीक है। प्रो. राय ने अपने अध्यक्षीय एवं स्वागत भाषण में बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का चिंतन भारतीय ज्ञान, परंपरा और संस्कृति में गहराई से निहित था। उन्होंने भारत की सनातन विचारधारा को युग के अनुकूल रूप में प्रस्तुत करते हुए एकात्म मानववाद का दर्शन दिया। इस अवसर पर वित्त नियंत्रक महेश चंद शर्मा, अकादमिक प्रभारी व सहायक कुलसचिव (परीक्षा) डॉ. आर सी मीना, उपकुलसचिव (सम्बद्धता) रामसिंह सरावग और सम्पदा और सामान्य प्रशासन प्रभारी कन्हैया लाल जांगिड़, उपनिदेशक आईटी पंकज मील समेत विवि के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. राजेन्द्र सिंह धन्यवाद ​ज्ञापित किया।
विभिन्न प्रतियोगिताओं में ​विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10:30 बजे निबंध लेखन, संभाषण और रंगोली प्रतियोगिताओं से हुई। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। कुलगुरु प्रो. राय ने कहा कि इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य युवाओं तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार पहुंचाना है।
पुस्तक परिचर्चा
दोपहर 1 से 3 बजे तक शेखावाटी विवि और अखिल भारतीय साहित्य परिषद् एवं शेखावाटी साहित्य संगम के संयुक्त तत्वावधान में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुस्तक ‘जगतगुरु शंकराचार्य’ पर परिचर्चा हुई। भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री मनोजजी ने पुस्तक की विस्तृत जानकारी दी और उस पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने उनके दार्शनिक और आध्यात्मिक चिंतन को आधुनिक संदर्भों से जोड़ा।

दीपोत्सव में 15000 दीपों से जगमगाया परिसर:
डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि यूडीएच मंत्रर झाबर सिंह खर्रा ने शाम 6:30 बजे विश्वविद्यालय परिसर में उपाध्याय जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि कर दीपोत्सव का शुभारंभ किया गया। दीपोत्सव में करीब 15,000 दीपों की रोशनी से परिसर जगमगा उठा और मनमोहक दृश्य उत्पन्न हुआ। इस अवसर पर शिक्षक, कर्मचारी और छात्र इस दीपोत्सव में उत्साहपूर्वक शामिल हुए।

 

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