सीकर जिले के बेरी गांव के किसान दिनेश तिवाड़ी ने जर्मन तकनीक से खेती कर अपने खेतों में लौकी की बंपर पैदावार की है। अपने दोस्त मोहम्मद नबी से प्रेरणा लेकर दिनेश ने बांस के ढांचे पर लौकी की बेलें उगाईं। दो बीघा जमीन पर बनाई गई इस संरचना में तारों के जाल के सहारे बेलें तेजी से बढ़ीं, और कुछ ही समय में शानदार गुणवत्ता की लौकी का उत्पादन शुरू हो गया। इन सब्जियों को दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में भी भेजा जा रहा है, जिससे प्रति बीघा 2 लाख रुपये तक की कमाई हो रही है।
दिनेश का कहना है कि जर्मन तकनीक से खेती करना लंबे समय में फायदेमंद है। हल्की सब्जियों जैसे खीरा, तोरई, और ककड़ी के लिए यह तकनीक उपयुक्त है। उन्होंने ड्रिप इरिगेशन का भी इस्तेमाल किया, जिससे पानी की बचत हुई। दिनेश का मानना है कि पारंपरिक फसलों की बजाय फूलों और सब्जियों की खेती किसान को बेहतर मुनाफा दे सकती है। उन्होंने अन्य किसानों को भी नवाचार अपनाने और अपने खेतों को सही तरीके से उपयोग में लाने की सलाह दी है।
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