उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने हाल ही में राज्यसभा में बयान दिया था कि वे RSS के एकलव्य बनकर रह गए, और इसके साथ ही उन्होंने इस संगठन के प्रति अपनी भावनाओं और जुड़ाव को साझा किया। यह बयान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अविश्वास प्रस्ताव का एक कारण बताया था, जिसके बाद विपक्षी दलों ने 10 दिसंबर को राज्यसभा में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया। भास्कर ने इस बयान को लेकर RSS के पूर्व प्रचारक और धनखड़ के साले, हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रवीण बलवदा से बातचीत की, ताकि धनखड़ के RSS से जुड़ाव को समझा जा सके।
धनखड़ ने बचपन में RSS से जुड़ाव नहीं रखा था, लेकिन राजनीति में आने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे RSS और बीजेपी नेताओं से संपर्क किया। 1988-89 में जनता दल के टिकट पर झुंझुनूं से सांसद बनने के बाद उनके संघ से नजदीकी रिश्ते स्थापित हुए। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस में शामिल होकर चुनाव लड़ा और बाद में बीजेपी से भी जुड़ाव बढ़ाया।
RSS और बीजेपी से कानूनी सहयोग
धनखड़ ने 2007 में RSS और बीजेपी के खिलाफ आतंकी घटनाओं को लेकर चल रहे कानूनी मामलों में पर्दे के पीछे रहकर मदद की। वे लीगल टीम के सदस्य के रूप में काम करते हुए चार्जशीट की कमियों और सबूतों के अभाव को उजागर करने में सहायक रहे, जिससे कई मामलों में उनके पक्ष में फैसला आया। इस दौरान उन्हें कानूनी संकट मोचक माना गया और बाद में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें पार्टी की लीगल सेल का संयोजक भी बनाया।
राम जन्मभूमि मामले में भूमिका
राम जन्मभूमि मामले में भी धनखड़ का पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण योगदान रहा। हालांकि वे बीजेपी में शामिल होने से पहले इस मुद्दे पर संघ के साथ थे, लेकिन 2003 में बीजेपी में शामिल होने के बाद भी उन्होंने इस मुद्दे पर कई महत्वपूर्ण कानूनी इनपुट दिए। 2019 में अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि “मंदिर तो बनेगा ही”, और उनके बयान से यह संकेत मिला कि वे इस मुद्दे पर सक्रिय थे, भले ही वे इस प्रक्रिया से पर्दे के पीछे जुड़े रहे हों।
उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी और RSS की सक्रियता
उपराष्ट्रपति पद के लिए चयन प्रक्रिया में भी RSS की सक्रिय भूमिका रही थी। 2022 में RSS की बैठक में धनखड़ का नाम उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में उभरा था, और इसके ठीक सात दिन बाद उनका नाम आधिकारिक रूप से घोषित कर दिया गया। यह दिखाता है कि RSS ने धनखड़ के राजनीतिक करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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