राइजिंग राजस्थान समिट से राज्य के विकास को मिलेगा नया मुकाम, विशेषज्ञों की राय…
राज्य की खनिज संपदा, आईटी सेक्टर और निवेश के मौके बनेंगे रोजगार के नए स्रोत
झुंझुनूं, राजस्थान में हाल ही में आयोजित राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इंवेस्टमेंट समिट के दौरान 35 लाख करोड़ के एमओयू हुए थे, और मंच से 8.5 लाख करोड़ के निवेश की घोषणाएं की गई। इस समिट के महत्व और प्रभाव पर शहर के प्रमुख सीए और एडवोकेट्स ने अपनी राय दी। विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान की खनिज संपदा और आईटी सेक्टर को बढ़ावा देने से राज्य में रोजगार के कई नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
सीए जिम्मी मोदी ने कहा कि राजस्थान के युवा बीपीओ और केपीओ सेंटर स्थापित होने से यहां रोजगार पा सकेंगे, जिससे कंपनियों की एचआर लागत भी घटेगी। साथ ही, स्किल डवलपमेंट के जरिए रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी। वहीं, दिनेश अग्रवाल ने कहा कि एमओयू को धरातल पर लाने के लिए सरकार को सिंगल विंडो पद्धति अपनानी चाहिए और खनिज संसाधनों की प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित करने के लिए तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
एडवोकेट श्रवण केजड़ीवाल का मानना है कि इन एमओयू को पूरा करने के लिए सरकार को समय और विशेषज्ञता की आवश्यकता होगी, और इसके लिए विशेष अधिकारियों की नियुक्ति करनी चाहिए। सीए हर्ष जालान ने इस समिट से पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के विकास की संभावना जताई, जबकि सीए सुभाषचंद्र कुमावत ने सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
समिट से राजस्थान की अर्थव्यवस्था में सुधार और रोजगार की संभावना बढ़ने की उम्मीद है, और यदि आधे एमओयू भी लागू होते हैं, तो इसका व्यापक असर होगा।
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