सफलता की कहानी, कमलेश देवी – ‘लखपति दीदी’ बनकर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर

सफलता की कहानी, कमलेश देवी – ‘लखपति दीदी’ बनकर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर

सीकर

सीकर जिले के पिपराली ब्लॉक के ग्राम दौलतपुरा की कमलेश देवी जो पहले अपने परिवार की आजीविका के लिए कृषि मजदूरी पर निर्भर थीं। सीमित संसाधनों और कम आय के कारण उनकी वार्षिक आमदनी 40,000 रुपये से भी कम थी, जिससे घर का खर्च चलाना, बच्चों की पढ़ाई कराना और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। आर्थिक तंगी के साथ-साथ सामाजिक बाधाएँ भी उनके आत्मविश्वास को प्रभावित करती थीं और भविष्य को लेकर हमेशा अनिश्चितता बनी रहती थी।

ऐसे कठिन समय में कमलेश देवी ने स्वयं सहायता समूह ‘सूर्या’ से जुड़ने का निर्णय लिया। राजीविका प्लेटफॉर्म के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता प्राप्त हुई, जिसने उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत की। उन्होंने सीखी हुई कौशलों का उपयोग करते हुए छोटे स्तर पर अपने उद्यम की शुरुआत की। सबसे पहले उन्होंने मसाला निर्माण का कार्य शुरू किया, जिसमें हल्दी, मिर्च और धनिया जैसे मसालों की पिसाई और पैकिंग शामिल थी। इसके बाद उन्होंने साबुन निर्माण का कार्य शुरू किया, जिसमें नहाने और कपड़े धोने के साबुन तैयार किए जाने लगे। साथ ही, उन्होंने अगरबत्ती निर्माण का कार्य भी शुरू किया, जिसकी स्थानीय बाजार में अच्छी मांग थी।

इन सभी गतिविधियों ने धीरे-धीरे उनकी आय के नए स्रोत तैयार किए और उनकी आर्थिक स्थिति में निरंतर सुधार होने लगा। जहाँ पहले उनकी कुल वार्षिक आय एक लाख रुपये से भी कम थी, वहीं अब यह बढ़कर 3 लाख रुपये से अधिक हो गई है। मसाला निर्माण से उन्हें लगभग 1 लाख रुपये, साबुन निर्माण से 80,000 रुपये और अगरबत्ती निर्माण व कृषि कार्य से लगभग 1.5 लाख रुपये तक की आय होने लगी। इस बढ़ती आय ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि उनके जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार किया।

कमलेश देवी ने अपने उद्यमों में स्वच्छता, गुणवत्ता और आधुनिक तकनीकों का विशेष ध्यान रखा, जिससे उनके उत्पादों की मांग और विश्वसनीयता बढ़ी। उन्होंने स्थानीय बाजारों, व्यापारियों और सरकारी योजनाओं के सहयोग से अपने उत्पादों के लिए बेहतर मार्केट लिंकेज स्थापित किए। साथ ही, उन्होंने अपने उत्पादों की ब्रांडिंग पर भी ध्यान दिया, जिससे उन्हें पहचान मिलने लगी।

आज कमलेश देवी न केवल आत्मनिर्भर बन चुकी हैं, बल्कि उन्होंने अपने परिवार और समुदाय के अन्य सदस्यों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। वे अब चार अन्य लोगों को भी रोजगार प्रदान कर रही हैं, जिससे उनके प्रयासों का लाभ पूरे समुदाय को मिल रहा है। उनकी यह यात्रा संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास का एक उत्कृष्ट उदाहरण है

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