दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, चुनौतियों की शुरुआत हैं : राज्यपाल बागडे
शेखावाटी विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह में 39 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और उपाधियां
दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, चुनौतियों की शुरुआत हैं : राज्यपाल बागडे
शेखावाटी विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह में 39 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और उपाधियां
तीन हस्तियों को मानद उपाधि, 3 शख्सियतों को ‘शेखावाटी शिरोमणि’ व 5 को ‘शेखावाटी भूषण’ सम्मान
सीकर।
राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, ज्ञान के व्यवहारिक उपयोग और जीवन की नई चुनौतियों की शुरुआत हैं। राज्यपाल बागडे शनिवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।
अध्यक्षीय उद्बोधन में राज्यपाल बागडे ने कहा कि आज डिग्री के साथ कौशल की भी आवश्यकता है। डिग्री हासिल करने के बाद आगे के बारे में भी सोचना चाहिए। अच्छी नौकरी चाहिए तो अपने आप को अपडेट करो। यूपीएससी और आरपीएससी की तैयारी करो, आगे बढ़ने की इच्छा शक्ति रखनी चाहिए।
अपने उद्बबोधन में पंडित दीनदयाल जी उपाध्याय का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि पंडितजी एक व्यक्ति नहीं संस्था थे। वे व्यक्ति नहीं समष्टि की सोचते थे। अंग्रेजों के आने के पहले भारत में 8 लाख गुरुकुल थे, गुरुकुल में सब विषयों को ज्ञान दिया जाता था।
बागड़े ने कहा कि नालंदा—तक्षशिला का इतिहास जरूर लौटकर आएगा। विद्यार्थियों से बौद्धिक क्षमता बढाने का आह्वान करत हुए कहा कि आप विश्वविद्यालय का नाम बड़ा बनाओ और आप भी बड़े बन जाओ। मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात शिक्षाविद्, लेखक एवं पद्मश्री सम्मानित प्रो. जगमोहन सिंह राजपूत उपस्थित रहे। प्रो. राजपूत ने कहा कि विद्यार्थियों को अच्छे रास्ते पर चलकर जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अनिल कुमार राय ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट रखी तथा भावी योजनाओं की जानकारी दी। प्रो. राय ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना है। हम शिक्षा को कौशल, नवाचार और शोध से जोड़ते हुए युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
डिप्टी रजिस्ट्रार (अकादमिक) रामसिंह सरावग ने बताया कि दीक्षांत समारोह में सत्र 2024-25 के स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले 39 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं उपाधियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर कुल 90 हजार 598 छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान की गईं, जिनमें से स्वर्णपदक के अलावा सभी विद्यार्थियों को उनके संबद्ध महाविद्यालयों के माध्यम से उपाधियां वितरित की जाएंगी। कुलसचिव श्वेता यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
तीन हस्तियों को मानद उपाधि
दीक्षांत समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए महाराष्ट्र के रामचन्द्र नीलकंठ भोगले, पश्चिम बंगाल के डॉ. धनपत राम अग्रवाल तथा झुंझुनूं (मुकंदगढ़) के श्री शैलेंद्रनाथ अघोरी बाबा को पीएच.डी. मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
दीनदयाल उपाध्याय शोध केन्द्र और ‘प्रेरणा स्थल’ का लोकार्पण
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार स्थित ‘प्रेरणा स्थल’ एवं ‘शौर्य की दीवार’ का उद्घाटन किया तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध केंद्र का लोकार्पण किया। इसके उपरांत उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर हस्तशिल्प प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
डॉ राठी, डॉ जैन और डॉ मिश्रा को शेखावाटी शिरोमणि
परीक्षा नियंत्रक प्रो. राजेंद्र सिंह ने बताया कि दीक्षांत समारोह के पश्चात आयोजित सम्मान समारोह में प्रख्यात चिकित्सक डॉ. घनश्याम लाल राठी, डॉ. विनोद कुमार जैन तथा शिक्षाविद् डॉ. रतन लाल मिश्रा को ‘शेखावाटी शिरोमणि सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया। वहीं समाजसेवा एवं विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए रामेश्वर लाल जांगिड़, लक्ष्मीनारायण राड, प्रदीप कुमार सैनी, गोपाल कृष्ण शर्मा एवं कर्नल राजेश भूकर को ‘शेखावाटी भूषण सम्मान’ प्रदान किया गया। इस अवसर पर दो दिवसीय वार्षिकोत्सव ‘प्रत्युषा 2026’ का भी शुभारंभ किया गया । इस अवसर पर विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। सहायक कुलसचिव परीक्षा डॉ. आरसी मीना, सहायक कुलसचिव संपदा कन्हैया लाल जांगिड़, निदेशक आईटी पंकज मील समेत अधिकारी कर्मचारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
संचालन डॉ. रेनू महलावत और डॉ. नीतू सिंह ने किया।

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