भारतीय शिक्षण मंडल का 57वां स्थापना दिवस मनाया, ‘स्वत्व पंचांग’ का हुआ विमोचन
भारतीय शिक्षण मंडल का 57वां स्थापना दिवस मनाया, ‘स्वत्व पंचांग’ का हुआ विमोचन
भारतीय शिक्षण मंडल का 57वां स्थापना दिवस मनाया, ‘स्वत्व पंचांग’ का हुआ विमोचन
सीकर
भारतीय शिक्षण मंडल, जयपुर प्रांत (सीकर इकाई) द्वारा 57वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में सोमवार को श्री कल्याण राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, सीकर में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर “स्वबोध – औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का मार्ग” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई।
कार्यक्रम का प्रारंभ डॉ. मुकेश शर्मा द्वारा प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए किया गया, जिसमें उन्होंने “स्वबोध” की अवधारणा, औपनिवेशिक मानसिकता के प्रभाव तथा भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की प्रमुख विशेषता भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित नवाचार “स्वत्व पंचांग” (कैलेंडर) का औपचारिक विमोचन रहा। यह पंचांग भारतीय समय-गणना, सूर्य सिद्धांत, ऋतु-चक्र एवं सांस्कृतिक परंपराओं को आधुनिक तकनीक के साथ समन्वित करने का एक अभिनव प्रयास है।
मुख्य अतिथि दंडी स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने अपने उद्बोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण पर बल देते हुए कहा कि “स्वबोध के माध्यम से ही राष्ट्र अपनी वास्तविक पहचान और शक्ति को पुनः प्राप्त कर सकता है।” उन्होंने अपने वक्तव्य में नदी विज्ञान (River Science) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भारतीय परंपराओं में नदियों के वैज्ञानिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक आयामों को रेखांकित किया। साथ ही, उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर विस्तृत विचार रखते हुए प्रकृति के साथ संतुलित जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता आदरणीय हनुमान सिंह जी ने अपने संबोधन में कहा कि आज आवश्यकता केवल तकनीकी प्रगति की नहीं, बल्कि विचारों की स्वतंत्रता, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और वैचारिक स्वराज की है। उन्होंने युवाओं से भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने और उसे व्यवहार में उतारने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि श्री आशीष मोदी, जिला कलेक्टर, सीकर ने भारत के आर्थिक एवं बौद्धिक सामर्थ्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश वैश्विक स्तर पर तेजी से उभर रहा है, किन्तु हमारी वास्तविक शक्ति हमारे नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत में निहित है। उन्होंने युवाओं से भारतीय ज्ञान परंपरा, विशेषकर संस्कृत भाषा के महत्व को समझने और अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर श्री विशाल कुमार जी (सह प्रांत प्रचारक, जयपुर प्रांत), श्री चेतन्य प्रकाश (विभाग प्रचारक, सीकर) तथा डा. ग्यारसी लाल जी (माननीय विभाग संघ चालक) सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में शिक्षाविदों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं एवं समाज में स्वबोध, आत्मगौरव तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति जागरूकता को सुदृढ़ करना रहा।
इस नवाचार की परिकल्पना एवं विकास कार्य प्रांत युवा गतिविधि प्रमुख, भारतीय शिक्षण मंडल, जयपुर प्रांत के डॉ. मुकेश शर्मा के नेतृत्व में संपन्न हुआ है। इसमें पंडित प्रदीप शास्त्री, डॉ. मोनिका शर्मा, डॉ. बीनू शेखावत, डॉ. आशा राणा, डॉ. राजेन्द्र चुण्डावत, वीणा सैनी की सहभागिता रही। समारोह के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महासचिव दंडी स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती होंगे। वहीं मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य हनुमानसिंह होंगे। समारोह में जिला कलक्टर आशीष मोदी, विभाग संघ चालक ग्यारसी लाल जाट भी मौजूद रहेंगे। इस कार्यक्रम में पर्यावरण शुद्धता का विशेष रुप से ध्यान रखा गया तथा रसायन मुक्त रंगोली का चित्रण किया गया.

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