हिन्दव: सोदरा: सर्वे, न हिन्दू पतितो भवेत् – हनुमान सिंह पालवास, भडाढर में विराट हिंदू सम्मेलन आयोजित

हिन्दव: सोदरा: सर्वे, न हिन्दू पतितो भवेत् - हनुमान सिंह पालवास, भडाढर में विराट हिंदू सम्मेलन आयोजित

हिन्दव: सोदरा: सर्वे, न हिन्दू पतितो भवेत् – हनुमान सिंह पालवास

भडाढर में विराट हिंदू सम्मेलन आयोजित

सीकर, 25 जनवरी ।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में देश भर में हिंदू-हिंदुत्व और राष्ट्र के भाव को एकता के सूत्र में पिरोने के उद्देश्य से आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन का भढ़ाडर मंडल के श्री राधा कृष्ण मैरिज गार्डन में आयोजित किया गया। परम पूज्य संत माधव दास जी महाराज दयालपुरा, सुभाष नाथ जी महाराज मैलासी एवं मुरारी दास जी महाराज के सानिध्य में सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता मंगलचंद मुवाल एवं मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक एडवोकेट हनुमान सिंह पालवास रहे।
सम्मेलन में मैलासी, रसीदपुरा, सबलपुरा भेरूपुरा, झीगर, सांवलोदा, भुकरा का बास गांव से मातृशक्ति एवं युवा डीजे के साथ नाचते झूमते भजन कीर्तन करते धार्मिक रैली के रूप में गाजे बाजे के साथ कार्यक्रम स्थल पहुंचे। जहां उपस्थित जन समूह ने माता बहनों का फूल वर्षा और भगवा दुपट्टा ओढ़ाकर स्वागत किया। सम्मेलन का शुभारंभ मां भारती के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित एवं दीप प्रज्वलन करके संतों एवं उपस्थित अतिथियों द्वारा किया गया। मुख्य वक्ता अधिवक्ता हनुमान सिंह पालवास ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष में संघ के मुख्य उद्देश्य सभी हिंदू सगे भाई बहन है कोई छोटा बड़ा और पतीत नहीं है, इस भाव के साथ सभी मे समरसता का भाव जगाने का काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने ब्रिटिश गुलाम भारत में फैली विषमताओं, जाति-पाति, संप्रदाय भाषा, क्षेत्रवाद, अलगावाद के नाम से हिंदू समाज छिन्न-भिन्न हो रहा था तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक परम पूज्य डॉक्टर केशव राम बलिराम हेडगेवार ने तत्कालीन कांग्रेस के पद से त्यागपत्र देकर इस संपूर्ण हिंदू समाज को भिन्न-भिन्न जातियों, क्षेत्र, भाषाओं और रीति नीति में बंटे हिंदू समाज को एकता के सूत्र में पिरोने के उद्देश्य से संघ की स्थापना की। मम दीक्षा राष्ट्र रक्षा-हिंदू रक्षा को पोषित किया।
संघ ने 100 वर्ष के कालखंड में भारत को स्वतंत्रता से लेकर बंटवारे में तथा आजाद भारत में 1962, 1965, 1971 के युद्ध में स्वयंसेवकों के योगदान की बात या आपातकाल में लोकतंत्र की रक्षा सहित बाढ़, अकाल,सुनामी, कोरोना तथा अन्य विषम परिस्थितियों में संघ का देश के प्रति दिया गया योगदान एवं नैतिक कर्तव्यों से उपस्थित जन समूह को अवगत कराया।
एडवोकेट पालवास ने कहा कि एक दूसरे की भिन्न-भिन्न भाषा, क्षेत्र, भूषा, भजन, पर्व, त्यौहार, संस्कृतियों को आपस में समान रूप से जोड़कर समानता का भाव विकसित करना ही हिंदुत्व है।
संघ अपने इन उद्देश्यों को लेकर शताब्दी वर्ष में समग्र हिंदू समाज को देश और धर्म की एकता अखंडता एवं संप्रभुता के लिए पंच परिवर्तन के विषयों को लेकर समाज में जन-जागरण कर रहा है।
पहले सामाजिक समरसता के माध्यम से भिन्न-भिन्न जातियों, भाषाओं और क्षेत्रों के पर्व-त्यौहार, खान-पान, वेशभूषा को समान रूप से आपस में एकता के सूत्र में जोड़ने का कार्य करके समाज में सामाजिक समरसता फैलाना उद्देश्य है।
दूसरा परिवार कुटुंब प्रबोधन: संघ संपूर्ण राष्ट्र को एक परिवार की तरह मानता है और उस राष्ट्र रूपी परिवार की रक्षा, सेवा एवं सुरक्षा का दायित्व हम सबका है।
तीसरा पर्यावरण संरक्षण: संघ का मानना है संपूर्ण सृष्टि सहित भारत भी प्रकृति और पर्यावरण को सुरक्षित और संवर्धित करके ही प्राणी मात्र का कल्याण कर सकता है। पर्यावरण संतुलन के बगैर जीवन की कल्पना अधूरी है।
चौथा स्व का भाव:
संघ स्वभाषा,स्वभूषा, स्व त्यौहार, स्व ग्रंथ एवं और स्व राष्ट्रीय नैतिक मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन से ही देश को अक्षुण बनाया जा सकता है।
पांचवा परिवर्तन नागरिक कर्तव्य एवं शिष्टाचार का पक्षधर है।
संघ का मानना है व्यक्ति जब तक अपने अधिकारों के साथ कर्तव्य के अवमानना नहीं करेंगे तब तक राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं संप्रभुता अधूरी है।
एडवोकेट पालवास ने हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए सभी से आवहान किया कि हम सब का पहला धर्म अपने कर्तव्यों की पालन करना है और कर्तव्यों का पालन करना ही धर्म है।
जब कर्तव्य की पालना सुनिश्चित होगी तब धर्म जीवित रहेगा और जब धर्म जीवित है तो राष्ट्र जीवित है।
हम सबको संघ के शताब्दी वर्ष में समान रूप से एक एक भाव होकर जाती-पाति, भाषा, क्षेत्रवाद, एवं अलगाववाद को परास्त करके एकता के सूत्र में संपूर्ण समाज को संगठित करके भारत राष्ट्र को परम वैभव पर पहुंचाना ही हिंदू सम्मेलनों का मुख्य ध्येय है।

 

 

Comments are closed.