बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम अन्तर्गत सीकर जिले की पहली निषेधाज्ञा जारी, बाल विवाह रोकने में ऐतिहासिक पहल

बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम अन्तर्गत सीकर जिले की पहली निषेधाज्ञा जारी, बाल विवाह रोकने में ऐतिहासिक पहल

सीकर

जिले में बाल विवाह के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण और मिसाल पेश करने वाली कार्रवाई सामने आई है, जहां दो नाबालिग बच्चियों के प्रस्तावित बाल विवाह को न केवल समय रहते रोका गया, बल्कि न्यायालय से निषेधाज्ञा (Injunction Order) प्राप्त कर इसे कानूनी रूप से भी प्रतिबंधित किया गया। यह कदम जिले में बाल विवाह रोकथाम के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।

श्रीमाधोपुर तहसील के नांगल भी पंचायत के मोहल्ले में दो नाबालिग बच्चियों के बाल विवाह की सूचना प्राप्त हुई। सूचना की पुष्टि होने पर 18 तारीख को जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस, गायत्री सेवा संस्थान, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं श्रीमाधोपुर थाना पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची।

जांच के दौरान सामने आया कि दोनों बच्चियां स्थानीय विद्यालय में अध्ययनरत हैं और हाल ही में कक्षा 10वीं की परीक्षा दे चुकी हैं। इनमें से एक की आयु 17 वर्ष तथा दूसरी की 15 वर्ष पाई गई। टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए परिजनों को नोटिस देकर बाल विवाह न करने हेतु पाबंद किया गया।

इसके बावजूद 19 तारीख को पुनः सूचना मिली कि विवाह की तैयारियां जारी हैं और पूर्व में दिए गए निर्देशों की अवहेलना की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं बाल अधिकारिता विभाग के सहयोग से न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया। जिस पर श्रीमाधोपुर न्यायालय द्वारा बाल विवाह के विरुद्ध निषेधाज्ञा आदेश जारी किया गया, जिससे प्रस्तावित विवाह को कानूनी रूप से रोक दिया गया।

यह आदेश जिले में बाल विवाह निषेध के तहत प्रथम न्यायिक निषेधाज्ञा है, जो भविष्य में ऐसे मामलों में एक सशक्त नजीर प्रस्तुत करेगा। इसके उपरांत परिजनों को न्यायालय में उपस्थित कर पुनः सख्ती से पाबंद किया गया।

इस पूरी कार्रवाई में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से सचिव डॉ. शालिनी गोयल, सीताराम जाखड़, बाल अधिकारिता विभाग से सहायक उपनिदेशक डॉ. गार्गी शर्मा, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस एवं गायत्री सेवा संस्थान से नरेश कुमार सैनी, अभिषेक बगड़िया, चाइल्ड हेल्पलाइन से राकेश कुमार, राहुल दानोदिया तथा श्रीमाधोपुर थाना पुलिस टीम सक्रिय रूप से शामिल रही।

इस अवसर पर बाल अधिकार विशेषज्ञ एवं पूर्व सदस्य राजस्थान बाल आयोग, राजस्थान सरकार डॉ. शैलेंद्र पंड्या ने कहा कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 13(1) के अंतर्गत न्यायालय द्वारा जारी यह निषेधाज्ञा आदेश अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल दो बालिकाओं के जीवन को सुरक्षित करने की दिशा में एक ठोस कदम है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि अब बाल विवाह जैसे अपराधों के विरुद्ध कानूनी हस्तक्षेप और अधिक प्रभावी एवं सख्त हो रहा है। ऐसे आदेश समाज में एक मजबूत संदेश देते हैं कि बाल विवाह किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

डॉ. शालिनी गोयल सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने कहा की शिक्षा नगरी सीकर में बाल विवाह जैसी कुरीति का होना अत्यंत चिंताजनक है। शिक्षा और सामाजिक कुरीतियां साथ नहीं चल सकतीं। शिक्षा ही इन कुरीतियों के उन्मूलन का सबसे प्रभावी माध्यम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थानीय संस्थाएं समय रहते सतर्क और सक्रिय रहें, तो बाल विवाह जैसी घटनाओं को प्रारंभिक स्तर पर ही रोका जा सकता है, जिससे बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

*बाल विवाह रोकथाम की दिशा में मजबूत संदेश*

यह कार्रवाई न केवल एक संभावित बाल विवाह को रोकने में सफल रही, बल्कि यह भी दर्शाती है कि प्रशासन, न्यायिक तंत्र और सामाजिक संगठनों के समन्वित प्रयास से इस कुरीति पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले, तो तुरंत टोल-फ्री राष्ट्रीय कानूनी सहायता हेल्पलाइन 15100, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पुलिस या संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाती है।

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