इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का शौर्य, वायुसेना के वीर सार्जेंट सुरेंद्र मोगा की अमर गाथा
इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ 'ऑपरेशन सिंदूर' का शौर्य, वायुसेना के वीर सार्जेंट सुरेंद्र मोगा की अमर गाथा
इतिहास के पन्नों से बाहर आई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के वीरों की अमर गाथा; वायुसेना के जांबाज सार्जेंट सुरेंद्र मोगा के अद्वितीय पराक्रम को मां भारती का नमन
सशस्त्र बल नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रक्षा मंत्रालय ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी 6 जांबाज शहीदों के नामों को आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक कर दिया है, जिसमें 5 थल सेना के जवान और भारतीय वायु सेना के एकमात्र वीर जांबाज सार्जेंट सुरेंद्र मोगा शामिल हैं।
इस ऐतिहासिक घोषणा के साथ ही पिछले साल जुलाई 2025 में संसद के भीतर रिकॉर्ड और बयानों को लेकर उपजा विवाद अब पूरी तरह शांत हो गया है और देश के इन ‘अनसंग हीरोज’ को उनका सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान मिल गया है। यह पूरा मामला तब गरमाया था जब 28 जुलाई 2025 को लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की समीक्षा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक प्रश्न के उत्तर में अनजाने में बयान दे दिया था कि इस अभियान में किसी सैनिक की कोई क्षति नहीं हुई है। इस तकनीकी व रणनीतिक बयान पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए झुंझुनूं के तत्कालीन सांसद बृजेंद्र ओला ने संसद में पुरजोर ढंग से रिकॉर्ड सुधारने की मांग उठाई थी और बताया था कि उनके जिले के वीर सपूत सार्जेंट सुरेंद्र मोगा इसी ऑपरेशन में शहीद हुए थे। उस दौरान मीडिया के माध्यम से शहीद की वीरांगना सीमा देवी और माता नानू देवी के भावुक बयान सामने आए थे, जिसमें वीरांगना सीमा देवी ने कहा था कि उन्हें सरकार से कुछ नहीं चाहिए, बस शहादत को पूरा सम्मान दिया जाए, वहीं मां नानू देवी ने कहा था कि लाल को खोने से बड़ी क्षति क्या हो सकती है।
जुलाई के अंत में संसद में उपजे विवाद के तुरंत अगस्त 2025 में भारतीय वायुसेना अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह स्वयं शहीद सुरेंद्र मोगा के पैतृक घर पहुंचे और वीरांगना व माता को ढांढस बंधाते हुए आश्वस्त किया था कि वायुसेना अपने जांबाज के बलिदान को कभी व्यर्थ नहीं जाने देगी। इसके पश्चात, देश के प्रति उनके अदम्य साहस का सम्मान करते हुए महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सार्जेंट मोगा को शहीदोपरांत प्रतिष्ठित ‘वायु सेना मेडल (गैलंट्री)’ से सम्मानित किया और वायुसेना ने नई दिल्ली स्थित एक आधिकारिक विंग का नाम हमेशा के लिए “सुरेंद्र हॉल” रख दिया।
आज इस गौरवशाली रक्षा रिकॉर्ड और घटनाक्रम के सार्वजनिक होने के बाद मेहरादासी के सभी ग्रामवासियों ने अपनी गहरी संतुष्टि व्यक्त की है। शहीद सुरेंद्र के चाचा प्यारेलाल, शिवचंद, भाई रवि,संजीव, राजेश ने भावुक होते हुए कहा कि भले ही उनके परिवार का चिराग हमेशा के लिए बुझ गया और यह दर्द कभी कम नहीं हो सकता, लेकिन आज उनके लाल का नाम राष्ट्रीय पटल पर गर्व से चमक रहा है। लंबे इंतजार के बाद सरकार द्वारा दी गई इस आधिकारिक स्वीकृति और मिले सम्मान से परिवार का मस्तक गर्व से ऊंचा हुआ है और वे देश के इस कदम के प्रति पूर्ण संतोष महसूस कर रहे हैं।
भारतीय वायु सेना से शहादत देने वाले एकमात्र योद्धा
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सीमा पार आतंकियों के सफाए के लिए चलाए गए इस बेहद खुफिया और खतरनाक मिशन में सार्जेंट सुरेंद्र मोगा पूरे भारतीय वायु सेना के इकलौते ऐसे जांबाज थे जिन्होंने अग्रिम पंक्ति में तैनात रहकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। थल सेना के पांच जवानों के साथ मिलकर वायुसेना के इस अकेले शूरवीर ने जिस पराक्रम का परिचय दिया, वह भारतीय सैन्य इतिहास में संयुक्त ऑपरेशन्स की एक अद्वितीय मिसाल बन गया है।
समग्र ऑपरेशन के दौरान राजस्थान की वीरधरा से इकलौते शहीद
शौर्य और बलिदान की भूमि कहे जाने वाले राजस्थान प्रदेश से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान वीरगति प्राप्त करने वाले सार्जेंट सुरेंद्र मोगा एकमात्र जांबाज थे। झुंझुनूं जिले के गांव मेहरादासी से निकलकर सीमा पार दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले सार्जेंट मोगा ने राजस्थान की सैन्य परंपरा के गौरव को एक नया आसमान दिया है। इस पूरे ऑपरेशन में उनका इकलौता राजस्थानी होना न केवल उनके गृह जिले बल्कि पूरे प्रदेश के लिए सर्वोच्च गर्व की बात है।
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