राजस्थान हाईकोर्ट ने लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) पर नए दिशा-निर्देश जारी किए…

एलओसी जारी करने के संबंध में कोर्ट ने संवेदनशील गाइडलाइंस और समीक्षा प्रक्रिया लागू की

राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया और राज्यभर के लिए लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) के इस्तेमाल पर नई गाइडलाइंस जारी की। जस्टिस अरुण मोंगा ने याचिकाकर्ता अभयजीत सिंह और अन्य के खिलाफ श्रीगंगानगर में दर्ज एक एफआईआर में जारी लुकआउट सर्कुलर को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि बिना उचित और पर्याप्त आधार के एलओसी जारी करना गलत है, क्योंकि इससे व्यक्तियों को अत्यधिक उत्पीड़न, अपमान और वित्तीय बोझ उठाना पड़ता है।

विदेश यात्रा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं हो सकता
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि लुकआउट सर्कुलर के चलते एक व्यक्ति का पासपोर्ट निलंबित या अमान्य हो जाता है, जिससे उसकी विदेश यात्रा पर प्रतिबंध लग जाता है। सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत विदेश यात्रा को मौलिक अधिकार माना है, और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

नए दिशा-निर्देशों में क्या होगा बदलाव?

  1. संज्ञेय अपराधों में ही एलओसी जारी होगा: केवल उन मामलों में जहां संज्ञेय अपराध शामिल हों और आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए देश छोड़ने की कोशिश कर रहा हो, वहां एलओसी जारी किया जा सकता है।
  2. एलओसी की वैधता: एलओसी की प्रारंभिक वैधता 4 सप्ताह से अधिक नहीं होगी, और इसके विस्तार के लिए लिखित कारण प्रस्तुत किए जाएंगे।
  3. पासपोर्ट धारक को सुनवाई का अधिकार: एलओसी जारी करने के 8 सप्ताह के भीतर पासपोर्ट धारक को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा।
  4. समीक्षा प्रक्रिया: एलओसी को हर 3 महीने में समीक्षा किया जाएगा और अगर अब इसकी जरूरत नहीं है तो इसे हटाया जाएगा।
  5. एलओसी हटाने का निर्देश: अगर आरोपी गिरफ्तार हो जाता है या एलओसी का उद्देश्य पूरा हो जाता है, तो बीओआई को एलओसी हटाने का अनुरोध भेजा जाएगा।

राज्य सरकार और पुलिस को संवेदनशील बनाने का निर्देश
कोर्ट ने राज्य सरकार के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए कि वे इन दिशा-निर्देशों के संबंध में सभी अधिकारियों को संवेदनशील बनाएं और इसका पालन सुनिश्चित करें। साथ ही, इन नए दिशा-निर्देशों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए कदम उठाने का आदेश दिया गया।

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