सीकर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता के परिणामस्वरुप केंद्र सरकार के द्वारा देशभर में अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (पीएम-कुसुम योजना) का उद्देश्य किसानों को ऊर्जा और जल सुरक्षा प्रदान करना, उनकी आय बढ़ाना, कृषि क्षेत्र को डीजल मुक्त करना और पर्यावरण प्रदूषण को कम करना है।
राज्य में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में कुसुम योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि क्षेत्र को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है। इसी कडी में सीकर जिले में योजना का व्यापक असर दिखाई दे रहा है। योजना के तहत सीकर जिले में 42 सोलर प्लांट स्थापित किए गए हैं, जिनमें प्रतिदिन 3.85 लाख यूनिट बिजली उत्पादन शुरू हो गया है।
प्लांट के शुरू होने से पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क पर 77 मेगावाट लोड कम हुआ है, क्योंकि इतना विद्युत उत्पादन क्षमता इन सोलर प्लांट से पूर्ति हो रही है। सोलर प्लांट्स के स्थापित होने से जिले में लगभग 3.69 प्रतिशत तक लोड में कमी दर्ज की गई है। इसके परिणामस्वरूप इन प्लांट्स की स्थापना से बिजली कटौती में कमी आई है, जिससे जिले के किसानों को सिंचाई के लिए दिन में भी निर्बाध विद्युत आपूर्ति हो रही है तथा आम उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिल रहा है।
अजमेर विद्युत वितरण निगम सीकर के अधीक्षण अभियन्ता सुभाष चन्द्र देवन्दा ने बताया कि जिले में आगामी दो माह में योजना के तहत करीब 15.65 मेगावाट क्षमता के 13 प्लांट और चालू होने की संभावना है, जिससे जिले में विद्युत तंत्र और सुदृढ होगा और अधिक बिजली उपभोक्ताओं खासकर किसानों को इसका फायदा मिलेगा।
क्या है पीएम कुसुम योजना:
पीएम कुसुम योजना के तहत कोई भी किसान अपनी जमीन पर सोलर प्लांट स्थापित कर सकता है, जिसकी क्षमता करीब 2 मेगावाट होती है। प्लांट से उत्पादित बिजली पास के डिस्कॉम के 33/11 केवी पावर हाउस को सप्लाई की जाती है, जहां से उपभोक्ताओं को बिजली वितरित की जाती है। इस प्रकार से 132 केवी पावर हाउस की माँग कम हो जाती है और बिजली कटौती में कमी आती है। इस उत्पादित बिजली के एवज में डिस्कॉम द्वारा प्रतिमाह सोलर उर्जा उत्पादक को भुगतान किया जाता है। योजना के तहत पीएम कुसुम कम्पोनेंट.ए के तहत जिले के 19 स्थानों पर तथा कम्पोनेंट सी में भी 23 स्थानों पर प्लांट्स स्थापित किए गए है।
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