मानव-वन्यजीव संघर्ष पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
मानव-वन्यजीव संघर्ष पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
सीकर
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली द्वारा जारी मानव-वन्यजीव संघर्ष के पीड़ितों के लिए न्याय तक पहुंच (HWC), 2025” योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सीकर द्वारा दो दिवसीय प्रारंभिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। प्रशिक्षण 4 मई 2026 एवं 5 मई 2026 को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सीकर के सभागार में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें सीकर न्यायक्षेत्र के समस्त पैरा लीगल वॉलंटियर्स, पैनल अधिवक्तागण एवं अन्य संबंधित हितधारक भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ रूपा गुप्ता, अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सीकर (जिला एवं सेशन न्यायाधीश), शालिनी गोयल, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सीकर तथा बृजेन्द्र सिंह रुलानियां, चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल, सीकर द्वारा किया गया। प्रशिक्षण के प्रथम दिवस पर परिचय एवं आइस-ब्रेकिंग सत्र के दौरान अध्यक्ष द्वारा प्रतिभागियों को मानव-वन्यजीव संघर्ष के पीड़ितों के लिए “न्याय तक पहुंच योजना 2025” के तहत उनकी भूमिका, कर्तव्यों एवं दायित्वों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि वन्यजीवों द्वारा किसी व्यक्ति के जीवन, आजीविका या संपत्ति को क्षति पहुंचने की स्थिति में प्रभावित व्यक्तियों को त्वरित विधिक सहायता, मुआवजा एवं अन्य राहत उपाय उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है, साथ ही वन्यजीव संरक्षण एवं मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना भी समान रूप से महत्वपूर्ण है।
द्वितीय सत्र में बृजेन्द्र सिंह रुलानियां द्वारा योजना के प्रमुख बिंदुओं पर विस्तृत प्रकाश डाला गया। तृतीय सत्र में महेश कुमार पटेल, डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल, द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21, 39(क), 48(क) एवं 51 तथा विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के प्रावधानों की जानकारी प्रदान की गई। चतुर्थ सत्र में आपदा प्रबंधन विभाग के प्रतिनिधि मदन सिंह कुड़ी द्वारा मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रकार, उससे होने वाली हानि तथा मानव एवं संसाधनों पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में अवगत कराया गया।
पंचम सत्र में सीताराम जाखड़, कनिष्ठ सहायक, द्वारा क्षेत्र में पैरा लीगल वॉलंटियर्स एवं पैनल अधिवक्ताओं की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। षष्ठ सत्र में सौरभ कुमार, सहायक वन संरक्षक एवं अमित देवन्दा, रेन्जर, वन विभाग, सीकर द्वारा मानव-वन्यजीव संघर्ष से होने वाली क्षति के प्रतिकर की प्रक्रिया, दावा प्रस्तुत करने हेतु आवश्यक दस्तावेजों एवं तथ्यों की जानकारी दी गई। साथ ही मानवों द्वारा वन्यजीवों को होने वाली क्षति एवं उनके प्राकृतिक आवास में हस्तक्षेप से उत्पन्न समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सक्षम बनाना है, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में निवासरत व्यक्तियों एवं समुदायों को समय पर विधिक सहायता, मुआवजा, जागरूकता एवं अन्य आवश्यक राहत उपाय उपलब्ध कराए जा सकें
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