राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय बजाजग्राम, सांवली में विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति किया जागरूक
श्री कल्याण राजकीय मेडिकल कॉलेज, सीकर की टीम ने नुक्कड़ नाटक एवं स्वास्थ्य वार्ता के माध्यम से दिया मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय बजाजग्राम, सांवली में विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति किया जागरूक
श्री कल्याण राजकीय मेडिकल कॉलेज, सीकर की टीम ने नुक्कड़ नाटक एवं स्वास्थ्य वार्ता के माध्यम से दिया मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश
सीकर।
मानसिक स्वास्थ्य माह (10 सितंबर से 10 अक्टूबर) के अंतर्गत श्री कल्याण राजकीय मेडिकल कॉलेज, सीकर द्वारा राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, बजाजग्राम, सांवली में विद्यार्थियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डॉ. शिबा सेठी गौतम, सहायक आचार्य, सामुदायिक चिकित्सा विभाग के नेतृत्व में मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों की टीम ने बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व एवं मानसिक परेशानी के लक्षणों के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को बताया गया कि मानसिक परेशानी होने पर दिल की धड़कन तेज होना, घबराहट महसूस होना, नींद न आना, मन में बेचैनी रहना, बिना किसी स्पष्ट कारण के डर लगना, बार-बार नकारात्मक विचार आना, उदासी महसूस होना, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी, पढ़ाई में मन न लगना तथा सामाजिक गतिविधियों से दूर रहने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
एमबीबीएस विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक से समझाया मानसिक स्वास्थ्य का महत्व
एमबीबीएस विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बच्चों को सरल एवं रोचक तरीके से समझाया कि मानसिक परेशानी होने पर उसे अपने मन में दबाकर न रखें और न ही अकेले घुटते रहें। अपनी परेशानी माता-पिता, शिक्षकों या किसी विश्वसनीय व्यक्ति के साथ साझा करें। आवश्यकता पड़ने पर मनोचिकित्सक (Psychiatrist) अथवा अन्य योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सहायता लेने में संकोच न करें।
डॉ. शिबा सेठी गौतम ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। जिस प्रकार शारीरिक बीमारी होने पर चिकित्सक से परामर्श लिया जाता है, उसी प्रकार मानसिक परेशानी होने पर भी समय पर सहायता लेना आवश्यक है। सामाजिक कलंक (Social Stigma) या लोगों की प्रतिक्रिया के डर से अपनी परेशानी को छिपाना उचित नहीं है। समय पर सहयोग और उपचार मिलने से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार संभव है।
उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में उनके साथ डॉ. मुकेश, मिस अंशुल तथा सामुदायिक चिकित्सा विभाग में पोस्टिंग कर रहे छह एमबीबीएस विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
कार्यक्रम से विद्यालय के बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने, अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करने तथा जरूरत पड़ने पर सहायता लेने का संदेश मिला। वहीं, मेडिकल विद्यार्थियों को भी समुदाय के बीच स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान करने, संवाद कौशल विकसित करने तथा आत्मविश्वास बढ़ाने का अवसर प्राप्त हुआ।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना तथा यह संदेश देना था कि “मानसिक परेशानी कमजोरी नहीं है; समय पर बात करना और मदद लेना समझदारी है।”
Comments are closed.