पद्मश्री संत श्री बैजनाथ जी महाराज ब्रह्मलीन,

श्री श्रद्धानाथ जी के आश्रम परिसर में कल 6 जून को प्रातः 10.15 बजे होगी समाधि

पद्मश्री संत श्री बैजनाथ जी महाराज ब्रह्मलीन

श्री श्रद्धानाथ जी के आश्रम परिसर में कल 6 जून को प्रातः 10.15 बजे होगी समाधि

महाराजश्री के सम्मान में कल लक्ष्मणगढ़ के बाजार रहेंगे आधा दिन बंद

लक्ष्मणगढ़

प्रख्यात कर्मयोगी संत, श्री श्रद्धानाथ जी आश्रम के पीठाधीश्वर एवं पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित श्री बैजनाथ जी महाराज आज शुक्रवार को ब्रह्मलीन हो गए। उनके ब्रह्मलीन होने का समाचार मिलते ही पूरे शेखावाटी क्षेत्र में शोक छा गया। उनके अनुयायी एवं सेवक बड़ी संख्या में उनके अंतिम दर्शनों के लिए आश्रम में उमड़ पड़े। महाराज के पार्थिव शरीर, जिसे आध्यात्मिक भाषा में शिव तनु कहा जाता है, को आश्रम परिसर में दर्शनार्थ विराजमान किया गया है, जहां हजारों दर्शनार्थियों ने पुष्पार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
बैजनाथ जी महाराज के उत्तराधिकारी शिष्य प्रकाशनाथ महाराज ने बताया कि महाराज को शनिवार प्रातः 10:15 बजे आश्रम परिसर में समाधि दी जाएगी। इस अवसर पर क्षेत्र के साधु संत एवं श्रद्धालु उपस्थित होंगे।

उल्लेखनीय है कि महाराज श्री को अध्यात्म, योग और वैदिक शिक्षा के क्षेत्र में निःस्वार्थ जीवनपर्यंत सेवा के लिए पिछले वर्ष ही भारत सरकार द्वारा देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा गया था।

संक्षिप्त जीवन परिचय
महाराज श्री के ब्रह्मलीन होने से शेखावाटी ने एक सच्चा संत खो दिया है। संत श्री बैजनाथ जी महाराज का जन्म 12 जून 1935 को सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ तहसील के पनलावा ग्राम में पिता पंडित झाबरमल शर्मा एवं माता सरस्वती देवी के यहां हुआ।
मात्र छह वर्ष की आयु में ही इनका नामकरण स्वयं श्री श्रद्धानाथजी महराज ने कर दिया था और उसी समय इन्हें अपना शिष्य भी स्वीकार कर लिया था। बचपन से ही इनको श्री श्रद्धानाथ जी महाराज ने अपने सानिध्य एवं देखरेख में रखकर धर्म, कर्म एवं योग की शिक्षा दी। बैजनाथ जी महाराज ने MA एवं B Ed करके सन् 1960 में ग्राम भारती विद्यापीठ कोठयारी का प्राचार्य पद संभाला। मात्र 25 छात्रों के साथ प्रारम्भ हुई इस स्कूल में छात्र संख्या बहुत अल्प समय में 1100 तक पहुंच गई।
महाराज श्री का संपूर्ण जीवन नई पीढ़ी को संस्कारित शिक्षा देने के लिए समर्पित रहा। श्री बैजनाथ जी महाराज ने जो विद्यार्थी तैयार किए, वे Civil सेवा, न्यायिक सेवा, Police सेवा, सेना, राजनीति, खेल, शिक्षा जगत, उद्योग जगत, चिकित्सा सेवा एवं व्यापारिक क्षेत्रों में बुलंदियों तक पहुंचे।
सन 1985 में श्री श्रद्धानाथ जी महाराज के आदेश पर इन्होंने आश्रम का कार्यभार संभाल लिया। श्री श्रद्धानाथ जी महाराज ने इनको विधिवत शिक्षा दीक्षा देकर उत्तराधिकारी भी बना दिया।
इनके द्वारा करवाए गए निर्माण कार्यों में समाधि मंदिर, गोरखनाथ मंदिर, मत्स्येंद्रनाथ मंदिर, श्रद्धा स्मृति मंदिर, श्रद्धा संस्कृत विद्यापीठ योग संस्थान, प्रज्ञान मंदिर तथा शिव साधना आश्रम माउंट आबू प्रमुख हैं।

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