महेशम श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिवस सुदामा चरित्र एवं परीक्षित मोक्ष की कथा

मेरे अवगुण का मत दीजो ध्यान लाडली श्री राधे पर भावुक हुए श्रद्धालु।

महेशम श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिवस सुदामा चरित्र एवं परीक्षित मोक्ष की कथा

मेरे अवगुण का मत दीजो ध्यान लाडली श्री राधे पर भावुक हुए श्रद्धालु।

सीकर।

स्व. महेश जी सिंधी की पावन स्मृति में आयोजित महेशम श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिवस व्यास पीठ से अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक इन्द्रेश जी महाराज ने सुदामा चरित्र एवं परीक्षित मोक्ष की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान हजारों श्रद्धालु भक्ति में भाव-विभोर नजर आए और हरि नाम संकीर्तन से पूरा कथा पंडाल गूंज उठा।

इन्द्रेश जी महाराज ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि जीवन में मित्रता ऐसी होनी चाहिए, जिसमें मित्र अपने मित्र को ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास करे। “जीवन में एक मित्र कृष्ण जैसा होना चाहिए, जो अपने मित्र को अपने बराबर बना दे।” उन्होंने कहा कि जो मित्र हमें अवगुणों की ओर ले जाए, उसे मित्र नहीं बल्कि शत्रु समझना चाहिए। वहीं जो मित्र हमें धर्म, सेवा और सत्कर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करे, वह केवल मित्र नहीं, बल्कि मित्र रूप में स्वयं ठाकुर जी हैं।

महाराज श्री ने गौ संरक्षण एवं गौ सेवा पर भी विशेष जोर देते हुए कहा कि गौ हमारी सनातन संस्कृति और आस्था का आधार है। उन्होंने कहा कि हमारे कान उस दिन यह सुनने के लिए तरस रहे हैं कि गौ हत्या करने वाले को मृत्यु दंड मिलेगा। गौ संरक्षण के लिए समाज को जागरूक होकर आगे आने का आह्वान किया।

अंतिम दिवस कथा में प्रकाश दास जी महाराज, अयोध्या हनुमानगढ़ी के महंत स्वामी चंद्रमादास जी महाराज एवं प्रेम प्रकाश आश्रम, सीकर के संत महेश जी महाराज जीण माता से श्यामसुंदर पूरी, दातारामगढ़ से नर्मदा पूरी जी महाराज,वरिष्ट भाजपा नेता हरिराम रणवा सहित अनेक संत-महात्माओं एवं शहर के गणमान्य लोगो का सानिध्य प्राप्त हुआ।

मीडिया प्रभारी संजय मोर ने बताया कि कथा के अंतिम दिन भी श्रद्धालुओं की भारी संख्या रही। आयोजन समिति एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पूरे आयोजन के दौरान व्यवस्थाओं को संभाले रखा तथा श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा।

कथा के समापन के अवसर पर नरेश सिंधी एवं नारवानी परिवार और भागवत कथा आयोजन समिति के सदस्यों ने सभी संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं, सामाजिक संगठनों, कार्यकर्ताओं, प्रशासन एवं मीडिया एवम पत्रकार बंधुओ का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी का हृदय से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया।

 

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